नशे से मुक्ति केवल उपचार नहीं, बल्कि पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से पुनर्स्थापन का प्रयास…
Category: हिमाचल
युवाओं को रोजगार के हिसाब से प्रशिक्षण मुहैया करवाना प्राथमिकता – उपायुक्त
शिमला। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आज उपायुक्त कार्यालय शिमला में जिला कौशल समिति…
कांग्रेस कार्यकर्ता शिष्टाचार के साथ जनता के बीच अपनी बात रखें: मुकेश अग्निहोत्री
पालकवाह में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हरोली की बैठक, संगठन को मजबूत करने और आगामी कार्यक्रमों पर…
क्षेत्रीय प्रयोगशाला व आईटीआई सुंदरनगर ने चलाया स्वच्छता अभियान,,,स्वच्छता के साथ विद्यार्थियों को 3आर सिद्धांत और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की दी जानकारी
शिमला। क्षेत्रीय प्रयोगशाला, हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सुंदरनगर तथा राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, सुंदरनगर द्वारा…
आपदा की त्रासदी पीछे छोड़ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे सराज के युवा, अपना पुस्तकालय बना सहायक
घर-द्वार पर स्तरीय पठन सामग्री से लाभान्वित हो रहे युवा, सरकार व प्रशासन को कहा थैंक्यू…
महिला खेलों से दिया स्वच्छ हवा और नशा मुक्ति का संदेश,,,महिला क्रिकेट समेत विभिन्न प्रतियोगिताओं में महिलाओं ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा
सुंदरनगर। स्वच्छ हवा और नशा मुक्त सुंदरनगर का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सुंदरनगर…
द्राहल में पोषण माह के अंतर्गत वृत्त स्तरीय शिविर आयोजित
जोगिंदर नगर। सीडीपीओ चौंतड़ा के अंतर्गत वृत्त द्राहल में पोषण माह के तहत वृत्त स्तरीय जागरूकता…
डिजिटल खरीद, गुणवत्ता सुधार, पता लगाने की क्षमता, एचडीपीएस और कस्तूरी कपास पहलों का प्रदर्शन किया जाएगा
नई दिल्ली।भारत सरकार का वस्त्र मंत्रालय, अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, भारतीय कपास निगम (सीसीआई) लिमिटेड के माध्यम से तेलंगाना के हैदराबाद में 6 अक्टूबर, 2026 को एक विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम ‘सुधार उत्सव 2026’ के भाग के रूप में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम कपास खरीद व्यवस्था को अधिक किसान-केंद्रित, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और कुशल बनाने के लिए वस्त्र मंत्रालय के समन्वय में सीसीआई द्वारा किए गए परिवर्तनकारी सुधारों को प्रदर्शित करेगा। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, तेलंगाना सरकार के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, किसान, उद्योग संघ और कपास एवं वस्त्र क्षेत्र के अन्य हितधारक एकत्रित होंगे। यह जमीनी स्तर पर सुधारों के प्रभाव को उजागर करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा तथा कपास मूल्य श्रृंखला में प्रमुख हितधारकों के बीच अनुभव साझा करने में सुविधा प्रदान करेगा। पिछले कुछ वर्षों में, सीसीआई ने कपास खरीद, किसान पंजीकरण, डिजिटल स्लॉट बुकिंग, प्रत्यक्ष भुगतान, गुणवत्ता मूल्यांकन, पता लगाने की क्षमता, कपास की बिक्री और हितधारक जुड़ाव को शामिल करते हुए प्रौद्योगिकी-सक्षम और संस्थागत सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य व्यापार करने में आसानी में सुधार लाना, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को मजबूत करना तथा कपास किसानों को सेवाओं की अधिक कुशल डिलीवरी सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सीसीआई के प्रमुख सुधारों और पहलों पर एक प्रस्तुति होगी, इसके बाद उनके कार्यान्वयन और प्रभाव को दर्शाने वाली एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन कार्यक्रम में यह दिखाया किया जाएगा कि किस प्रकार डिजिटल प्रौद्योगिकियां और प्रक्रिया पुनः इंजीनियरिंग पारंपरिक प्रणालियों को बदल रही हैं और किसानों, सीसीआई, जिनर्स और वस्त्र उद्योग के बीच अधिक सहज इंटरफेस बना रही हैं। इस कार्यक्रम में कपास किसानों और उद्योग हितधारकों द्वारा अनुभव साझा करने की भी सुविधा होगी, जिससे सुधारों में भाग लेने वाले और उनसे लाभान्वित होने वालों से सीधे सुनने का अवसर मिलेगा। चर्चा में कपास की गुणवत्ता में सुधार, उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (एचडीपीएस), कस्तूरी कपास भारत, कपास खरीद के डिजिटलीकरण और कपास मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के अन्य उपायों से संबंधित महत्वपूर्ण पहलों पर चर्चा की जाएगी। कपास किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदर्शित की जाने वाली प्रमुख पहलों में से एक होगा। इस प्लेटफॉर्म ने डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से कपास खरीद के विभिन्न चरणों को एक साथ लेकर आया है, जिसमें किसान पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग, खरीद-संबंधी संचार और आधार-सक्षम भुगतान शामिल हैं। ऐसी पहलों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करना और किसानों को खरीद प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करना है। इस कार्यक्रम में भारतीय कपास की गुणवत्ता में सुधार और पहचान करने के लिए सीसीआई के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला जाएगा, जिसमें कस्तूरी कपास भारत पहल के तहत संदूषण नियंत्रण, डिजिटल पहचान और प्रीमियम गुणवत्ता वाले कपास को बढ़ावा देने की पहल शामिल है। इन उपायों का उद्देश्य भारतीय कपास की पहचान, गुणवत्ता और बाजार स्थिति को बढ़ाना तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी स्वीकार्यता को मजबूत करना है।