मकर संक्रांति पर तत्तापानी में आस्था का सैलाब, तुलादान और पवित्र स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे ततापानी

ततापानी/करसोग। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तत्तापानी में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शिमला से करीब 56 किलोमीटर दूर स्थित इस धार्मिक स्थल पर सुबह 4 बजे से गर्म पानी के स्रोत में स्नान का सिलसिला शुरू हो गया, जो दिनभर जारी रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के साथ-साथ तुलादान भी कर रहे हैं।

तत्तापानी की सबसे बड़ी विशेषता यहां सतलुज नदी के किनारे निकलने वाला प्राकृतिक गर्म पानी है। मान्यता है कि इस जल में स्नान करने से त्वचा से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए करीब 3 क्विंटल खिचड़ी भोग के रूप में तैयार की गई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में तत्तापानी में साढ़े 4 क्विंटल खिचड़ी बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया जा चुका है। उस दौरान हरियाणा के यमुनानगर से विशेष पतीला मंगवाकर खिचड़ी तैयार की गई थी।

इस अवसर पर प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत नेगी भी तत्तापानी पहुंचे और उन्होंने प्रदेश व देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।

पूर्व राष्ट्रपति भी कर चुके हैं स्नान

तत्तापानी के पंडित टेकचंद शर्मा ने बताया कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 22 सितंबर 1952 को तत्तापानी आए थे और उन्होंने यहां स्नान किया था। उस समय उन्होंने स्नान सरोवर का उद्घाटन भी किया था। उद्घाटन की पट्टिका आज भी समाजसेवी प्रेम रैना द्वारा अपने होटल में सुरक्षित रखी गई है, हालांकि वह सरोवर अब डैम बनने के कारण जलमग्न हो चुका है।


तत्तापानी नाम का अर्थ
‘तत्तापानी’ शब्द का अर्थ होता है ‘गर्म पानी’। सतलुज नदी के किनारे लगभग एक किलोमीटर के दायरे में गर्म जलधाराएं निकलती हैं। सर्दियों में जब आसपास का तापमान 4 से 6 डिग्री तक गिर जाता है, तब भी यहां गर्म पानी बहता रहता है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण है।
साल 2013 में सतलुज नदी पर कौल डैम बनने के बाद पुराना जलाशय डूब गया था। इसके बाद भूवैज्ञानिक विभाग ने ड्रिलिंग के जरिए नदी किनारे फिर से गर्म पानी के स्रोत खोजे, जहां अब स्नान कुंड बनाए गए हैं।
ऋषि जमदग्नि और परशुराम की तपोभूमि
तत्तापानी को ऋषि जमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोस्थली माना जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में महर्षि जमदग्नि ने पत्नी रेणुका और पुत्र परशुराम के साथ यहां एक गुफा में निवास किया था। वे प्रतिदिन यज्ञ के बाद भंडारे का आयोजन करते थे। आज भी इस परंपरा को सूद परिवार निभा रहा है।
97वीं बार बनी खिचड़ी
शिमला निवासी मोहित सूद ने बताया कि उनके पूर्वज पिछले 96 वर्षों से मकर संक्रांति पर तत्तापानी में खिचड़ी बनाते आ रहे हैं। इस वर्ष 97वीं बार खिचड़ी तैयार की गई और हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप परोसी गई। इस परंपरा की शुरुआत उनके पूर्वज बिहारी लाल ने की थी।
तत्तापानी कैसे पहुंचें
शिमला से तत्तापानी पहुंचने के लिए शिमला–करसोग हाईवे का रास्ता लिया जा सकता है। शिमला से तत्तापानी की दूरी 56 किलोमीटर, मंडी से 120 किलोमीटर और करसोग से 45 किलोमीटर है। छोटा सा गांव होने के बावजूद सल्फर युक्त गर्म पानी के झरनों के कारण तत्तापानी तेजी से एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है।

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