Shimla.. हिमाचल प्रदेश सरकार ने निराश्रित बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ स्टेट का दर्जा दिया है. राज्य सरकार इन बच्चों को हर महीने पॉकिट मनी देने के साथ बाहरी राज्यों का भ्रमण पर भी भेज रही है. शिमला से भी चिल्ड्रन ऑफ़ स्टेट को चंडीगढ़, आगरा, दिल्ली और गोवा के भ्रमण पर भेजा गया. इन सभी राज्यों से घूमने के बाद चिल्ड्रन ऑफ स्टेट वापस शिमला पहुंचे और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह से मिले. इस दौरान बच्चों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने भ्रमण का अनुभव साझा किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने निराश्रित बच्चों को न सिर्फ़ चिल्ड्रन ऑफ़ स्टेट का दर्जा दिया, बल्कि उन्हें उनका अधिकार भी दिया है. सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान कर रही है. इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संस्थानों से परिचित करवाना था, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में उनकी केंद्रीय आलाकमान के साथ मुलाक़ात हुई है. आने वाले वक़्त में मंत्रिमंडल में फेरबदल भी संभावित है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ राज्य की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की और हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया. केंद्रीय मंत्री को 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुत किए गए ज्ञापन एवं अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी दी. उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित किए जाने का आग्रह किया. उन्होंने 16वें वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड के दौरान राज्यों के राजस्व एवं व्यय अनुमानों के यथार्थवादी आकलन पर बल दिया. इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के साथ मुलाक़ात के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से हिमाचल प्रदेश से जुड़ी परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों को केन्द्र सरकार के समक्ष रखने और प्रदेश के विकास में सहयोग का आग्रह किया. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत केन्द्रीय मंत्री से विस्तृत चर्चा की. उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास से जुड़ी परियोजनाओं सहित आयुष्मान भारत योजना में केन्द्रीय सहयोग का आग्रह किया.