नई दिल्ली। प्रमुख शहरों में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं:
- भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने निम्नलिखित योजनाएं लागू की हैं:-
- भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए (एफएएमई इंडिया) योजना का दूसरा चरण : सरकार ने इस योजना को 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू किया है। इसके लिए कुल 11,500 करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत ई-2W, ई-3W और ई-4W वाहनों की मांग को प्रोत्साहन दिया गया और ई-बसों के लिए अनुदान तथा ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (ईवी पीसीएस) स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की गई। एफएएमई -II के अंतर्गत ई-2W, ई-3W और ई-4W सहित लगभग 16.71 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा दिया गया और विभिन्न शहरों के लिए 6,862 ई-बसों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 7 फरवरी 2026 तक 5,195 ई-बसें शुरू की जा चुकी हैं।
- भारत में मोटर वाहनों और उनके कलपुर्जों के उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (पीएलआई-ऑटो): भारत सरकार ने 23.09.2021 को भारत में मोटर वाहनों और वाहनों के कल पुर्जे उद्योग के लिए इस योजना को अधिसूचित किया, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों सहित उन्नत मोटर वाहन प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है, जिसके लिए 25,938 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
- उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना: सरकार ने 09.06.2021 को देश में एसीसी के निर्माण के लिए 18,100 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ पीएलआई योजना अधिसूचित की। इस योजना का उद्देश्य 50 गीगावॉट एसीसी बैटरी के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
- पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (पीएम ईड्राइव) योजना: 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना को 29.09.2024 को अधिसूचित किया गया है। यह योजना लगभग 28.27 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिनमें ई-2W, ई-3W, ई-ट्रक, ई-बस और ई-एम्बुलेंस शामिल हैं। इसके अलावा, ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (ईवी पीसीएस) और परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन भी इस योजना में शामिल है। योजना के अंतर्गत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 13,800 ई-बसें दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत सहित चार मिलियन से अधिक आबादी वाले सात शहरों में आवंटित की गई हैं।
- प्रधानमंत्री ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (पीएसएम) योजना : 28.10.2024 को अधिसूचित इस योजना का परिव्यय 3,435.33 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सहयोग करना है। इस योजना का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (पीटीए) द्वारा भुगतान में चूक होने की स्थिति में ई-बस संचालकों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करना है।
- भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजना (एसपीएमईपीसीआई ) 15 मार्च, 2024 को अधिसूचित की गई थी। इसके अंतर्गत आवेदकों को न्यूनतम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा और तीसरे वर्ष के अंत तक न्यूनतम 25% और पांचवें वर्ष के अंत तक न्यूनतम 50% का विकास लाभ (डीवीए) प्राप्त करना होगा।
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल लागत को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं। इसमें बैटरी की लागत भी शामिल है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन जनता के लिए किफायती बन सकें:
- प्रत्यक्ष सब्सिडी: उपभोक्ताओं के लिए खरीद मूल्य को कम करने के लिए पीएम ई-ड्राइव के अंतर्गत अग्रिम मांग प्रोत्साहन।
- कर संबंधी लाभ: इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, और चार्जर/चार्जिंग स्टेशनों पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्यों को सड़क कर और पंजीकरण शुल्क माफ करने की सलाह दी गई है।
- घरेलू विनिर्माण: पीएलआई-एसीसी और पीएलआई-ऑटो योजनाओं का उद्देश्य उन्नत रसायन विज्ञान बैटरी सेल और इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहन कल पुर्जों के लिए क्रमशः पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं बनाकर और निर्भरता को कम करके लागत को कम करना है, जिसके लिए निर्माताओं को बिक्री से जुड़ी सब्सिडी प्रदान की जाती है।
इन संयुक्त उपायों के माध्यम से, सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च लागत पर सक्रिय रूप से काम कर रही है और उन्हें किफायती बनाने की दिशा में काम कर रही है।
बीएचईएल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश में कुल 29,151 ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (ईवीपीसीएस) स्थापित किए जा चुके हैं। हालांकि, इसके लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत पूरे भारत में पर्याप्त संख्या में ईवीपीसीएस की स्थापना के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
सरकार पीएलआई-एसीसी योजना के माध्यम से लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के विकास का समर्थन कर रही है, जिसके तहत एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए 18,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) को पीएलआई-ऑटो योजना के तहत पात्र उत्पाद के रूप में शामिल किया गया है।
एफएएमई -II और पीएम ई ड्राइव योजनाओं के चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पी एम पी) के अंतर्गत ट्रैक्शन बैटरी पैक एक अनिवार्य हिस्सा है।
यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।