नई दिल्ली।केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारत जिसे लंबे समय से ‘विश्व की औषधालय’ के रूप में मान्यता प्राप्त है, अब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विश्व का नवप्रवर्तक’ बनने की ओर अग्रसर है। आज मुंबई में आयोजित 11वें वैश्विक फार्मास्युटिकल गुणवत्ता शिखर सम्मेलन को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह परिवर्तन स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा, विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती और वैज्ञानिक उत्कृष्टता पर केंद्रित दृष्टिकोण से प्रेरित है ।

वैश्विक दवा क्षेत्र में भारत के बढ़ते नेतृत्व और गुणवत्ता, नवाचार और स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को न केवल पैमाने के माध्यम से बल्कि गुणवत्ता, विश्वसनीयता और नवाचार के माध्यम से भी मजबूत करना चाहिए।
नड्डा ने प्रमुख सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का नीतिगत ढांचा इस परिवर्तन के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली बायोफार्मा शक्ति पहल भारत को वैश्विक जैव-औषधीय विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी, जिससे घरेलू उत्पादन मजबूत होगा और अनुसंधान क्षमता का विस्तार होगा। इसके अलावा, पीआरआईपी (फार्मा मेडटेक में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली) योजना नई दवाओं, जटिल जेनेरिक दवाओं, टीकों और उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा दे रही है।
नड्डा ने उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग की भूमिका का उल्लेख किया, यह पूर्वानुमानित निदान, औषधि ट्रेसबिलिटी, फार्माकोविजिलेंस और समग्र गुणवत्ता प्रणालियों को मजबूत करने में सहायक है। उद्योग के हितधारकों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि गुणवत्ता को केवल अनुपालन आवश्यकता के रूप में नहीं, बल्कि एक मूल संगठनात्मक मूल्य के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने एक स्थायी “गुणवत्ता-प्रथम” इकोसिस्टम के निर्माण के लिए मानव संसाधन, प्रणालियों और बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अग्रणी बनने के भारत के दृष्टिकोण को दोहराया। यह बड़े पैमाने पर काम करने के साथ-साथ विश्वास, नवाचार के साथ सहयोग और विकास के साथ जिम्मेदारी को जोड़ता है। इससे वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल परिणामों में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।