भारत ने जैविक विविधता सम्मेलन में अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की

नई दिल्ली। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय  ने जैविक विविधता पर सम्मेलन (सीबीडी) को भारत की सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (एनआर-7) प्रस्तुत की है, जिसमें सम्मेलन के तीन उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई है: जैविक विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से उत्पन्न होने वाले लाभों का निष्पक्ष और समान बंटवारा।

राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करना जैविक विविधता सम्मेलन के पक्षकारों का अनिवार्य दायित्व है। एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में, भारत ने अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का निरंतर पालन किया है और अनुच्छेद 26 के तहत आवश्यक सभी पिछली राष्ट्रीय रिपोर्टों को समय पर जैविक विविधता सम्मेलन को प्रस्तुत किया है। कॉप निर्णय 15/6 के अनुसार, भारत ने अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (एनआर-7) 28 फरवरी 2026 की नियत तिथि से पहले, 26 फरवरी 2026 को प्रस्तुत कर दी है।

एनआर-7 रिपोर्ट भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (एनबीएसएपी 2024-2030) और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (केएमजीबीएफ) के अनुरूप एक व्यापक, संकेतक-आधारित राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। यह रिपोर्ट 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (एनबीटी) की अपेक्षा 142 राष्ट्रीय संकेतकों पर आधारित है। इस मूल्यांकन में 33 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों, वैधानिक प्राधिकरणों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य हितधारकों से प्राप्त समन्वित सुझावों को शामिल किया गया है।

भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता-7 रिपोर्ट बताती है कि सभी 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य (एनबीटी) वर्तमान में “प्राप्ति की दिशा में अग्रसर” हैं, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं के बीच मजबूत तालमेल को दर्शाता है। रिपोर्ट में “समग्र सरकारी” और “समग्र सामाजिक” दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है, जो भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों में लंबे समय से चली आ रही प्रथाओं को प्रतिबिंबित करता है। यह रिपोर्ट बुनियादी ढांचे, कृषि, वानिकी और तटीय क्षेत्र की नीतियों में जैव विविधता सुरक्षा उपायों को एकीकृत करते हुए 33 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की भागीदारी को उजागर करती है।

भारत ने जैव विविधता को समाहित करने वाली भू-आकृति एवं समुद्री परिदृश्य योजना को काफी मजबूत किया है। दर्ज वन क्षेत्र 7,75,377 वर्ग किमी (भौगोलिक क्षेत्र का 23.59 प्रतिशत) है, जिसमें से वन आवरण 5,20,365 वर्ग किमी (15.83 प्रतिशत) है। कुल वन एवं वृक्ष आवरण 8,27,356.95 वर्ग किमी (25.17 प्रतिशत) तक पहुंच गया है, जो निरंतर स्थानिक योजना एकीकरण को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय महत्व के अधिसूचित रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या 2014 में 26 से बढ़कर 2026 तक 98 हो गई है।

भारत के संरक्षण नेटवर्क में अब 58 बाघ अभ्यारण्य, 33 हाथी अभ्यारण्य, 18 जीवमंडल अभ्यारण्य, 106 राष्ट्रीय उद्यान और 574 वन्यजीव अभ्यारण्य शामिल हैं। भारत में 3,682 बाघ हैं (वैश्विक बाघ आबादी का 70 प्रतिशत से अधिक)। पहले हिम तेंदुआ जनसंख्या आकलन के अनुसार, भारत में 4,014 एक सींग वाले गैंडे, 22,446 जंगली हाथी, 891 एशियाई शेर और लगभग 718 हिम तेंदुए हैं। डॉल्फिन परियोजना के तहत, नदी डॉल्फिन की आबादी के पहले आकलन की रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर जारी किया गया है, जिसमें देश में 6,327 नदी डॉल्फिन की आबादी बताई गई है।

भारत ने 22 कृषि जैव विविधता हॉटस्पॉट का दस्तावेजीकरण किया है और विविधता, विशिष्टता और कृषि विरासत के आधार पर 171 देशी फसलों और 230 देशी पशु नस्लों, 769 जंगली पौधों (सीडब्ल्यूआर) के संरक्षण को प्राथमिकता दी है।

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