स्कूलों में ‘जल महोत्सव’ की गूंज, बच्चों  ने संभाली पानी बचाने की जिम्मेदारी,रैलियों, पोस्टरों और अन्य गतिविधियों के जरिए बच्चों ने दिया जल संरक्षण का संदेश

समग्र शिक्षा के तहत हिमाचल के स्कूलों में  ‘जल महोत्सव’   का बड़े स्तर पर आयोजन

शिमला। जल जीवन का आधार है और इसके बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। तेजी से बढ़ती आबादी, घटते जल स्रोत और बदलते पर्यावरण के कारण आज पूरा विश्व जल संकट की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में पानी की हर बूंद को बचाना केवल जरूरत ही नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी बन चुकी है। खासतौर पर जब बच्चों को इस मुहिम से जोड़ा जाता है, तो इसका असर घर-घर तक पहुंचता है और समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है।
इसी सोच के साथ समग्र शिक्षा के तहत प्रदेश के स्कूलों में बड़े स्तर पर ‘जल महोत्सव’ का आयोजन किया गया। विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस अभियान में छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यह पहल Mission LiFE (Lifestyle for Environment) से जुड़ी है, जिसके जरिए लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि जल सहित प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जा सके।
*जल महोत्सव के दौरान स्कूलों में कराई गई विभिन्न गतिविधियां*
जल महोत्सव के दौरान स्कूलों में विभिन्न गतिविधियां की गईं जिसमें स्कूली बच्चों में पूरे उत्साह से भाग लिया। कहीं बच्चे पोस्टर बनाकर पानी बचाने का संदेश दे रहे थे, तो कहीं स्लोगन और निबंध के जरिए अपनी सोच व्यक्त कर रहे थे। क्विज प्रतियोगिताओं ने बच्चों की समझ को और मजबूत किया, वहीं जागरूकता रैलियों के माध्यम से यह संदेश स्कूलों से निकलकर समाज तक पहुंचा। बच्चों को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) जैसे विषयों को समझाया गया और कई स्कूलों में इसके मॉडल भी दिखाए गए, जिससे बच्चे इसे आसानी से समझ सकें। इन गतिविधियों के जरिए छात्रों ने न सिर्फ पानी की अहमियत को समझा, बल्कि यह भी जाना कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे कदम उठाकर पानी को कैसे बचाया जा सकता है। पानी का पुनः उपयोग, अनावश्यक बहाव रोकना और स्वच्छ जल का महत्व—इन सभी पहलुओं पर बच्चों ने सीख हासिल की। इस जल महोत्सव में शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने बच्चों को प्रेरित करने के साथ-साथ खुद भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में जल महोत्सव का आयोजन बड़े स्तर पर किया गया है। इस पहल के माध्यम से बच्चों को न केवल जागरूक किया गया, बल्कि उन्हें जल संरक्षण को अपनी आदतों में शामिल करने के लिए भी प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि यदि बचपन से ही पानी बचाने की समझ विकसित हो जाए, तो आने वाले समय में समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है।

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