SHIMLA. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि कुछ समाचार एवं सोशल मीडिया के माध्यम से एचपीवी वैक्सीन को लेकर भ्रामक एवं निराधर सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं, जिनमें यह दावा किया गया है कि बिना एचपीवी टीकाकरण के बेटियों की विदेश यात्रा संभव नहीं होगी तथा इसके लिए प्रमाण-पत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा ऐसे कोई भी दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। विदेश यात्रा के लिए एचपीवी टीकाकरण अथवा उसका कोई प्रमाण-पत्र अनिवार्य नहीं है।
एचपीवी टीकाकरण एक पूर्णतः स्वैच्छिक प्रक्रिया है। केवल अभिभावकों की सूचित सहमति प्राप्त होने के पश्चात् ही पात्र किशोरियों का टीकाकरण किया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि टीकाकरण से पूर्व अभिभावकों को इसके लाभ एवं आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाए और उनकी सहमति ली जाए।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह टीका मुख्यतः 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए निःशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है। एचपीवी संक्रमण भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का एक प्रमुख कारण बनता है, जबकि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार यह वैक्सीन इस गम्भीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में अत्यंत प्रभावी पाई गई है।
उन्होंने सभी अभिभावकों एवं आमजन से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग एवं अधिकृत स्रोतों से प्राप्त प्रामाणिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
उन्होंने कहा कि एचपीवी टीकाकरण के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अभिभावक अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान, चिकित्सा अधिकारी या आशा कार्यकर्ता से सम्पर्क कर सकते हैं।