प्रौद्योगिकी का उपयोग युवाओं के बहुमूल्य समय की बर्बादी के लिए नहीं, बल्कि उनके कौशल और क्षमताओं को बढ़ाने के साधन के रूप में किया जाना चाहिए: लोक सभा अध्यक्ष

नई दिल्ली।कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन, जोन–VII का प्रथम सम्मेलन, जिसका उद्घाटन कल लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया गया था, आज गोवा के राज्यपाल,  पी. अशोक गजपति राजू के समापन संबोधन के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएँ व्यापार, शिक्षा और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, और नीति-निर्माण एवं कानून-निर्माण में उनका प्रतिनिधित्व उनकी उपलब्धियों के अनुरूप बढ़ना चाहिए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम  का उल्लेख करते हुए  बिरला ने कहा कि महिलाओं की अधिक भागीदारी से शासन में अधिक संवेदनशीलता आएगी, जिससे नीति-निर्माण अधिक जन-केंद्रित होगा और समाज की आवश्यकताओं के अधिक अनुरूप बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएँ पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभा रही हैं और शासन एवं विकास में एक नवीन एवं रचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर रही हैं।

उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), की सार्वजनिक संवाद को सशक्त बनाने में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बिरला ने कहा कि ये प्रगति लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिक सहभागिता को बढ़ा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ती जन-भागीदारी से नीति-निर्माण अधिक सार्थक और प्रभावी होता है। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रौद्योगिकी का उपयोग युवाओं के बहुमूल्य समय की बर्बादी के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे उनके कौशल और क्षमताओं को बढ़ाने के साधन के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए।

प्लेनरी सत्रों में हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि CPA जोन VII के तीन राज्यों—महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा—ने तटीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने बताया कि इन राज्यों ने चुनौतियों को अवसरों में बदलने के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। नीर क्रांति जैसी पहलों के साथ-साथ रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों को पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि गोवा अपनी मजबूत आतिथ्य परंपरा के कारण विश्व के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र भी पर्यटन क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे हैं।

बिरला ने कहा कि सम्मेलन में युवा विधायकों ने विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि तीन राज्यों के विधायकों के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और हरियाणा के पीठासीन अधिकारियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अनुभव, युवा शक्ति और नवाचार को मिलाकर प्रतिभागियों ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

उन्होने कहा कि CPA जोन VII का यह ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण प्रथम सम्मेलन कई दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में विधायकों के बीच व्यापक औपचारिक और अनौपचारिक चर्चाओं के साथ-साथ गोवा के माननीय राज्यपाल  पी. अशोक गजपति राजू के ज्ञान और समृद्ध संसदीय अनुभव का भी लाभ मिला, जिन्होंने समापन संबोधन दिया। उन्होंने बताया कि कुल 31 विधायकों ने अपने विचार और अनुभव साझा किए, जिससे सभी प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण सीख मिली।

बिरला ने आगे गर्व के साथ कहा कि सम्मेलन के दौरान औपचारिक और अनौपचारिक दोनों प्रकार के आदान-प्रदान ने नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं के साझा करने में सहायता की। उन्होंने कहा कि व्यापार, पर्यटन और नवाचार के क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया, साथ ही प्रतिभागियों ने चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन इस आशा के साथ किया कि CPA जोन VII का यह प्रथम सम्मेलन देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा, और प्रतिभागी अपने-अपने राज्यों में लौटकर क्षेत्रीय विकास तथा विकसित भारत के विज़न के लिए दीर्घकालिक कार्य योजनाएँ लागू करने के संकल्प के साथ कार्य करेंगे।

इस अवसर पर गोवा विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. गणेश गावकर ने स्वागत संबोधन दिया।

 

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