15 जून की राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल के लिए टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित

कुल्लू । राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अभिकरण (एनडीएमए) के सौजन्य से हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन अभिकरण द्वारा 15 जून को आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल की तैयारियों के तहत वर्चुअल माध्यम से टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई।
इस एक्सरसाइज में आपदा आधारित 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल की तैयारियों की एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ द्वारा समीक्षा की गई तथा जिला प्रशासन सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग सहित सभी जिलों की खोज एवं बचाव योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
टेबल टॉप एक्सरसाइज में अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव चौहान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, आईटीबीपी, एसएसबी, पुलिस, अग्निशमन सेवा, होमगार्ड, भारतीय सेना तथा आपदा मित्रों ने भाग लिया।
एक्सरसाइज का उद्देश्य आपदा की स्थिति में उपलब्ध आधारभूत ढांचे, विभागीय समन्वय, संसाधनों तथा त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा करना और उसके आधार पर 15 जून को आयोजित होने वाली मॉक ड्रिल का प्रभावी एवं सफल संचालन सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में बताया गया कि जिला कुल्लू में निर्धारित आपदा परिदृश्यों के अनुसार अभ्यास किया जाएगा। मणिकर्ण घाटी में बादल फटने की काल्पनिक घटना को आधार बनाकर एलाइन-दुहांगन परियोजना क्षेत्र में मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इस दौरान अर्ली वार्निंग सिस्टम के सक्रिय होने के बाद प्रभावित क्षेत्र को खाली कराने, खोज एवं बचाव अभियान चलाने तथा राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जाएगा।
एक्सरसाइज के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि कुल्लू जिले सहित हिमाचल प्रदेश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता वाले सिस्मिक ज़ोन-5 में स्थित है, जिससे आपदा प्रबंधन के लिए पूर्व तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र का महत्व और बढ़ जाता है।
बैठक में भूकंप, बाढ़, वनाग्नि तथा ग्लेशियर झीलों के टूटने (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड-जीएलओएफ) जैसी संभावित आपदाओं की स्थिति में प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए मॉक ड्रिल की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया।
अंत में सभी विभागों को अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने, उपलब्ध संसाधनों का सत्यापन करने तथा संयुक्त अभ्यास के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

 

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