24 जून तक वित्तीय देनदारियों का नही हुआ भुगतान तो 25 जून को चक्का जाम करेंगे HRTC कर्मी

शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों को एरियर भत्ते और ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलने पर कर्मचारी एक बार फिर मुखर हो गए हैं। कर्मचारियों ने सरकार और निगम प्रबंधन को 24 जून तक का समय दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि 24 जून तक ओवरटाइम सहित अन्य भत्तों का भुगतान नहीं किया गया तो 25 जून से कर्मचारी सड़कों पर उतरकर चक्का जाम आंदोलन शुरू करेंगे।शनिवार को शिमला के ओल्ड बस स्टैंड में HRTC कर्मचारी यूनियन ने धरना-प्रदर्शन किया और सरकार तथा निगम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से निगम के कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है। उन्होंने सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 24 तारीख तक उनकी सभी जायज मांगों को स्वीकार नहीं किया गया, तो 25 तारीख से पूरे प्रदेश में बसों का चक्का जाम कर दिया जाएगा। मान सिंह ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी अब किसी भी तरह के झूठे आश्वासनों या ‘लॉलीपॉप’ के झांसे में नहीं आएंगे और इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। जरूरत पड़ने पर वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
​यूनियन के अध्यक्ष ने कर्मचारियों की वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार ने पिछले 75 महीनों का नाइट ओवरटाइम नहीं दिया है, जो कि लगभग 150 करोड़ रुपये बनता है। इसके अलावा, पूरे प्रदेश के कर्मचारियों का एरियर और मेडिकल रीइंबर्समेंट का करोड़ो रुपये अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) पिछले आठ महीनों से रुकी हुई है और चालक-परिचालकों की चार-चार भर्तियां अटकी पड़ी हैं। वेतन विसंगतियों को दूर करने, सीनियर चालकों के मुद्दों और पीस मील वर्करों को नियमित करने जैसी मांगों को भी लंबे समय से लटकाया जा रहा है।
​वेतन के भुगतान में हो रही देरी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मान सिंह ने कहा कि हर महीने कभी 5, कभी 10 तो कभी 15 तारीख को वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पीटरहॉफ में 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी, लेकिन धरातल पर एक रुपया भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि निगम के घाटे में होने के लिए कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि शासन, प्रशासन और उनका सिस्टम कसूरवार है जो केवल मुफ्त की योजनाएं बांटकर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहता है। यूनियन ने साफ कर दिया है कि वे हर महीने पहली तारीख को वेतन देने का नोटिस दे चुके हैं, और इस बार जब तक सारा बकाया पैसा कर्मचारियों के बैंक खातों में नहीं आ जाता, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। यदि दो तारीख तक वेतन नहीं मिलता है, तो दो तारीख से भी गाड़ियों का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

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