लक्कड़ बाजार में तहबाजरियों ने सजाई दुकानें ,नॉन-वेंडिंग जोन को लेकर तहबाजारियों और निगम कर्मचारियों में बहस

 

भारी पुलिस बल की तैनाती, तहबाजारियों ने कहा- उजाड़ने के बजाय बसाने की नीति अपनाए सरकार

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार सुबह लक्कड़ बाजार में नॉन-वेंडिंग जोन में दुकानें सजाने को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया। कुछ तहबाजारियों ने नॉन-वेंडिंग जोन में अपनी दुकानें लगा दीं। इसकी सूचना मिलते ही नगर निगम शिमला के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और कारोबारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया।
तहबाजारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र को सिंकिंग जोन बताते हुए नॉन-वेंडिंग जोन घोषित किया गया था, अब उसी जगह पर भारी वाहन पार्क किए जा रहे हैं। कारोबारियों का आरोप है कि अगर यह क्षेत्र उनके लिए नॉन-वेंडिंग जोन है तो यहां भारी वाहनों की पार्किंग कैसे की जा रही है। उनका कहना है कि नियमों का पालन सिर्फ रेहड़ी-फड़ी वालों पर ही लागू किया जा रहा है।

तहबाजारी विक्रेता सुनीता ने कहा कि वे पिछले लगभग12 वर्षों से इसी स्थान पर हाथ से बने सामान बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रही हैं। पिछले 2-3 महीनों से काम बंद होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि घर में राशन का संकट पैदा हो गया है और बच्चे भूखे बैठने को मजबूर हैं। पैसों की तंगी के चलते वे अपनी तीन बेटियों के स्कूल और ट्यूशन की फीस नहीं भर पा रही हैं, जिससे उनके बच्चों का स्कूल जाना तक बंद हो गया है। सुनीता ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि वे कोई बहुत बड़ी जगह नहीं मांग रही हैं, बल्कि उन्हें उसी स्थान पर बैठने और काम करने के लिए थोड़ी सी जगह दे दी जाए ताकि वे अपना और अपने परिवार का गुज़र-बसर कर सकें।

तहबाजारी विक्रेता सुदेश ने कहा, “मैं पिछले 25 वर्षों से इसी स्थान पर बैठकर अपना गुज़र-बसर कर रही हूँ। मेरे पति नहीं हैं। मैं बूट, जुराबें और कनपट्टियाँ (टोपियाँ/हैंडमेड सामान) बुनकर बेचती हूँ और इसी से अपने परिवार का पेट पालती हूँ। उन्होंने कहा कि यह लगाई गई लाइन से हम पीछे बैठा करते थे, लेकिन अब यहाँ से भी हमें हटा दिया गया है और दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। समझ नहीं आता कि अब हम कहाँ जाएँ और क्या करें? बुढ़ापे और बीमारी के कारण मैं इतना भाग-दौड़ भी नहीं सकती। बर्फबारी के समय गिरने से मेरी पीठ की हड्डी और माँस में गंभीर चोट आई थी। साथ ही अन्य रोगों से ग्रसित हूँ और इसी काम से अपनी दवाइयों का खर्च निकालती हूँ।हमारी बस इतनी ही माँग है कि हमें इसी स्थान के पीछे बैठने दिया जाए

तहबाजारी यूनियन के अध्यक्ष पवन शर्मा ने कहा कि नगर निगम अब विक्रेताओं को यह कहकर हटा रहा है कि यह स्थान ‘सिंकिंग ज़ोन’ (धंसता हुआ क्षेत्र) है. उन्होंने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि विक्रेता यहाँ वर्षों से अपनी दुकानें लगाकर आजीविका चला रहे थे और अगर यह सच में सिंकिंग ज़ोन है, तो कमेटी की बड़ी-बड़ी गाड़ियां यहाँ कैसे पार्क हो रही हैं.नगर निगम द्वारा विक्रेताओं को दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन जिस स्थान की बात कर रहा है, वहाँ ग्राहकों की आवाजाही नहीं है. उन्होंने माँग की कि जब तक विक्रेताओं को ऐसा उचित स्थान नहीं दिया जाता जहाँ उनका रोज़गार सही से चल सके, वे इसी तरह अपनी दुकानें लगाकर विरोध जारी रखेंगे.