
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज इटानगर में अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए विधायकों से लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखने और प्रदेश तथा राष्ट्र के विकास की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
अरूणाचल प्रदेश की विधानसभा को संबोधित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश का अत्यधिक रणनीतिक महत्व है, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है और प्रचुर प्राकृतिक संसाधन हैं। यही नहीं, यह राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शेष देश की सुरक्षा अरुणाचल प्रदेश के लोगों द्वारा सीमाओं की रक्षा से घनिष्ठता से जुड़ी हुई है।
भारत की विविधता में एकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश एक संविधान, ‘राष्ट्र प्रथम’ की एक दृष्टि और 2047 तक विकसित भारत के एक लक्ष्य से एकजुट है। राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्यम भारती को उद्धृत करते हुए उन्होंने भारत की विविध भाषाओं और परंपराओं में निहित विचार की एकता पर प्रकाश डाला।
भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत को याद करते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताया और विधायकों से इस विरासत को कायम रखने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर बढ़ते ध्यान को रेखांकित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में स्थापित किए गए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत इस क्षेत्र पर दिए गए जोर का उल्लेख किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश सरकार और वहां के निवासियों को प्रदेश की विकास उपलब्धियों के लिए बधाई दी, जिनमें देश में कीवी के अग्रणी उत्पादक के रूप में इस प्रदेश का उभरना, सड़क अवसंरचना का विस्तार, एक लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्डों का जारी होना और शिक्षा एवं प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय प्रगति शामिल है।
अरूणाचल विधानसभा को स्वर्ण जयंती पूरी करने पर बधाई देते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने विधान सचिवालय को प्लास्टिक मुक्त बनाने और विधानसभा पुस्तकालय एवं संग्रहालय की स्थापना जैसी पहलों की सराहना की।