ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 शुष्क भूमि पर दिल्ली घोषणा पत्र के साथ संपन्न

नई दिल्ली। तीन दिवसीय ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 आज नई दिल्ली में शुष्क-भूमि कृषि के लिए समाधानों में तेजी लाने एवं दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग को बढ़ाने के सशक्त आह्वान के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिन संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस के साथ संबंधित रहा और इसका समापन ‘शुष्क भूमि पर दिल्ली घोषणापत्र(3डी)’ को अपनाने के साथ हुआ, जिसमें ग्लोबल साउथ में सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, नवाचार और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से शुष्क भूमि कृषि में बदलाव लाने के लिए एक साझा एजेंडा तय किया गया। समापन सत्र में ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 में भाग लेने वाली सरकारों, संस्थानों, साझेदारों और प्रतिनिधियों ने इसे अनुमोदित किया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग(डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने शुष्क भूमि कृषि से जुड़े प्रयासों के केंद्र में दूरदर्शिता लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने एक मजबूत संस्थागत तंत्र की आवश्यकता बतलाई और कहा कि आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि आर्थिकी एवं नीति अनुसंधान संस्थान(आईसीएआर-एनआईएपी) को शुष्क भूमि कृषि पर दूरदर्शिता के काम का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने शुष्क भूमि कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए मजबूत डेटा और सूचना प्रणालियों के साथ-साथ ऐसे सामान्य नवाचार आधारों अथवा जीवित प्रयोगशालाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जो अनुसंधान को व्यवहार और नीति से जोड़ते हैं।

आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए शुष्क भूमि के रणनीतिक महत्व पर बल दिया और पिछले तीन दिनों के विचार-विमर्श को ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने विचार-विमर्श के निष्कर्षों को संक्षिप्त रूप से संकलित कर उन्हें अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्यों में प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने विशेषज्ञता, ज्ञान और सौहार्द को एक साथ लाकर विचारों से अवधारणाओं की ओर तथा अवधारणाओं से ठोस कार्रवाई और कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।

समापन सत्र में सम्मेलन से उभरकर आई नई साझेदारियों और सहयोगों पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। ग्लोबल क्रॉप डाइवर्सिटी ट्रस्ट के साथ नए समझौतों और सहमति पत्रों की घोषणा की गई। इसके अलावा, शुष्क भूमि कृषि में नवाचार और कार्रवाई को बढ़ावा देने वाली साझेदारियों को और मजबूती प्रदान करते हुए आईसीआरआईएसएटी ने एविओर लाइफ साइंसेज, निफ़्टम (NIFTEM), विप्रो लिमिटेड और ओडिशा के अंगुल तथा रायगढ़ जिला प्रशासनों के साथ भी एमओयू का आदान-प्रदान किया। इस सम्मेलन के सह-अध्यक्ष, डॉ. डी.के. यादव (उप महानिदेशक – फसल विज्ञान, आईसीएआर) और डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड (उप महानिदेशक – अनुसंधान एवं नवाचार, आईसीआरआईएसएटी) ने तीन दिवसीय विचार-विमर्श का सारांश प्रस्तुत किया और सम्मेलन से निकले मुख्य परिणामों एवं सिफारिशों पर प्रकाश डाला।

इससे पहले, दिन की शुरुआत दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र(यूएन) दिवस के अवसर पर एक स्मृति समारोह के साथ हुई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एफएओ के महानिदेशक तथा यूएनओएसएससी की निदेशक सुश्री दीमा अल-खतीब के संदेश शामिल थे। आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कृषि में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता(आईएसएससीए) का विजन साझा किया और वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच साझेदारियों को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला। आईसीआरआईएसएटी, आईसीएआर, सीजीआईएआर, आरआईएस, नाबार्ड तथा सीजीआईएआर कैपेसिटी शेयरिंग एक्सेलेरेटर के प्रतिनिधियों ने अधिक प्रभाव के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके बाद सीजीआईएआर के सहयोग से “नॉलेज विदाउट बॉर्डर्स: दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग को को बढ़ावा देना” सत्र आयोजित किया गया। दो पैनल चर्चाओं में दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग को प्रभावी बनाने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के उपायों पर विचार किया गया। इथियोपिया, सेनेगल, ब्राजील, चीन और भारत की राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों के वक्ताओं के साथ-साथ सीजीआईएआर, फारा(एफएआरए) और अपारी(एपीएएआरआई) के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और विजन साझा किए।