कैचमेंट एरिया शिमला की जल सुरक्षा, पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण आधार : अनिरुद्ध सिंह

वन्यजीव सप्ताह समारोह के तहत वाटर कैचमेंट सैंक्चुरी, ढल्ली में स्वच्छता अभियान आयोजित

शिमला। वन्यजीव सप्ताह समारोह-2026 के तहत आज वाटर कैचमेंट सैंक्चुरी, ढल्ली में उद्घाटन समारोह एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री अनिरुद्ध सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम का आयोजन वन्यजीव विंग, हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा किया गया।
वन्यजीव सप्ताह का संदेश वन्यजीवों के आवासों का संरक्षण कर स्वास्थ्य और आजीविका को सुरक्षित रखना।

*कैचमेंट एरिया शिमला की जल सुरक्षा का आधार*

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कैचमेंट एरिया केवल जंगल नहीं, बल्कि शिमला के जल स्रोतों, पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता का महत्वपूर्ण आधार है। पेड़ वर्षा और बर्फ के पानी को अपने भीतर संचित रखते हैं तथा गर्मी के मौसम में इसे धीरे-धीरे छोड़ते हैं, जिससे प्राकृतिक जलस्रोतों और चश्मों का पुनर्भरण होता रहता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को जंगल, जल और वन्यजीव संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।

*बच्चों को समझना होगा पानी के पीछे की प्राकृतिक प्रक्रिया*

मंत्री ने कहा कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि पानी केवल नल या बोरवेल से नहीं आता, बल्कि इसके पीछे पूरी प्राकृतिक प्रक्रिया और पारिस्थितिकी तंत्र कार्य करता है। उन्होंने कहा कि शिमला के कैचमेंट क्षेत्र का इतिहास भी जल संरक्षण से गहराई से जुड़ा है। ब्रिटिश काल में शिमला की बढ़ती आबादी की जल आवश्यकता को देखते हुए इस क्षेत्र को कैचमेंट के रूप में विकसित किया गया था।

उन्होंने कहा कि कैचमेंट क्षेत्र का जंगल शिमला की भविष्य की जल सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। जंगलों में वर्षा और बर्फ का पानी रुकता है तथा धीरे-धीरे जमीन में पहुंचकर प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्भरण में योगदान देता है।

*जंगल और जल स्रोतों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी*

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि जंगलों और जल स्रोतों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।

उन्होंने जंगल में प्राकृतिक रूप से गिरे पेड़ों और जैविक अवशेषों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये अनेक जीव-जंतुओं, कीट-पतंगों और सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन एवं आवास उपलब्ध करवाते हैं तथा विघटित होकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी योगदान देते हैं। उन्होंने जंगलों में घास और झाड़ियों को काटकर जलाने की प्रवृत्ति को कम करने का आह्वान किया।

*प्लास्टिक प्रदूषण वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा*

मंत्री ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत जागरूकता नाटक की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है। कई बार पशु-पक्षी प्लास्टिक को भोजन समझकर खा लेते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों में प्लास्टिक के प्रवेश को रोकना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कैचमेंट क्षेत्र में प्लास्टिक की बोतलों को नियंत्रित करने के लिए अपनाई गई सुरक्षा राशि व्यवस्था की सराहना की और अन्य वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों में भी ऐसी व्यवस्थाओं की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया।

*प्रकृति पर्यटन को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने पर जोर*

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि लोग प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली, पक्षियों और वन्यजीवों का आनंद लेने के लिए ऐसे क्षेत्रों का रुख करते हैं। इसलिए कैचमेंट क्षेत्र में उपलब्ध ट्रेल्स को चरणबद्ध तरीके से प्रकृति पर्यटन के लिए विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने ट्रेल्स पर प्रवेश एवं निकासी के लिए टिकट काउंटर और कंप्यूटरीकृत व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि आगंतुकों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। साथ ही जंगल में प्रवेश करने वाले लोगों की उचित जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रकृति पर्यटन को बढ़ावा देने से कैचमेंट क्षेत्र को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायता मिल सकती है।

*पेड़-पौधों की जानकारी क्यूआर कोड से उपलब्ध करवाने का सुझाव*

मंत्री ने वन विभाग को कैचमेंट क्षेत्र में मौजूद पेड़-पौधों और औषधीय वनस्पतियों की जानकारी देने वाले सूचना पट्ट लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पेड़-पौधे के स्थानीय एवं वैज्ञानिक नाम, उपयोगिता, औषधीय गुण तथा पारिस्थितिकी में भूमिका की जानकारी क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध करवाई जा सकती है।

उन्होंने कैचमेंट क्षेत्र के प्रवेश स्थल पर एक बड़ा सूचना पट्ट लगाने का सुझाव भी दिया, जिसमें क्षेत्र का इतिहास, विस्तार, जलस्रोतों की जानकारी तथा जल संग्रहण एवं वितरण प्रक्रिया का उल्लेख हो।

*स्थानीय समुदाय और स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने पर जोर*

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कैचमेंट क्षेत्र में कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक प्रबंधन के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को कैचमेंट क्षेत्र की गतिविधियों से जोड़ने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की बिक्री, छोटे स्तर पर रोजगार और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से समुदाय को संरक्षण व्यवस्था का भागीदार बनाया जा सकता है। स्वयं सहायता समूहों की सहायता से जंगल एवं आसपास के क्षेत्रों की नियमित साफ-सफाई तथा प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है।

*“पेड़ रहेंगे तो हमारा जीवन रहेगा*

मंत्री ने वन विभाग द्वारा पर्यावरण, जंगल और वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि असंख्य जीव-जंतुओं, पक्षियों, कीट-पतंगों और सूक्ष्मजीवों का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र हैं। प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि “पेड़ रहेंगे तो हमारा जीवन रहेगा।” जैव विविधता, जंगल और जल स्रोतों का संरक्षण सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य के लिए आवश्यक है।

ये अधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर प्रधान मुख्य अरण्यपाल आलोक प्रेम नागर ,मुख्य अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन, अरण्यपाल किरूपा शंकर, प्रीति भट्टारे, डीएफओ शिमला ग्रामीण अनिकेत, उप अरण्यपाल डॉ. शयनवाज भट्ट , ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अशोक ठाकुर, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राम कृष्ण शांडिल तथा रविंद्र चौहान सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।