नई दिल्ली। आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), गढ़खटंगा, रांची द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) एवं जनजातीय उप-योजना (TSP) के अंतर्गत 08 अक्टूबर 2026 को प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला एवं रामगढ़ जिलों से लगभग 1,500 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना तथा वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना था।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ICAR-IIAB की विभिन्न नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा NEXTGEN Breeding Facility शामिल हैं। इसके साथ ही ICAR-IIAB में नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई, जिसकी लागत 119 करोड़ रुपये है।
कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक एवं पारंपरिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की जनजातीय परंपराओं में जल, पौधों एवं प्रकृति के अन्य तत्वों के संरक्षण और महत्व की गहरी समझ विद्यमान है। उन्होंने ICAR-IIAB को अनुसंधान, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के संगम के रूप में रेखांकित किया।
चौहान ने कहा कि वर्तमान कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित कृषि को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप उपयुक्त फसलों एवं किस्मों के चयन, किसानों को उन्नत बीजों की उपलब्धता तथा कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने सब्जियों, अनाज एवं पशुधन को शामिल करते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा उर्वरकों के उचित उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नकली बीज, मिलावटी उर्वरक एवं घटिया कीटनाशकों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक गांव तक पहुंचाने तथा आगामी रबी मौसम के लिए किसानों को वैज्ञानिक जानकारी एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा “लैब टू लैंड” की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए आगामी दिनों में देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने का भी आह्वान किया।