आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ती कुल्लू की महिलाएँ

SHIMLA.हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अब महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की पहचान भी बनता जा रहा है। भुंतर विकास खंड के गड़सा क्लस्टर अंतर्गत कार्यरत शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह इस बदलाव की सशक्त मिसाल बनकर उभरा है।
भलान-एक पंचायत की 13 महिलाओं से गठित यह समूह पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों के सहारे आजीविका का मजबूत साधन बन चुका है। समूह की महिलाएँ पारंपरिक अचार, चटनियाँ, खाद्य उत्पादों के साथ-साथ कुल्लवी पट्टू और शाल का निर्माण कर रही हैं, जिन्हें पर्यटकों के बीच खास पसंद मिल रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और हिमाचल सरकार के सहयोग से समूह को लगभग 8 लाख रुपये की आधुनिक फूड वैन उपलब्ध करवाई गई है। इसके माध्यम से कुल्लू के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर शुद्ध, स्थानीय और पारंपरिक भोजन किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। विद्यार्थियों और पर्यटकों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराकर समूह सामाजिक सरोकारों का भी निर्वहन कर रहा है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में मिले सहयोग से उन्हें स्थायी रोजगार और आत्मसम्मान मिला है। आर्थिक मजबूती के साथ-साथ परिवार और समाज में उनका विश्वास भी बढ़ा है।
‘हिमइरा’ ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पादों ने ग्रामीण महिलाओं को पहचान दिलाई है और कुल्लू की पारंपरिक संस्कृति को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने का माध्यम बने हैं। शिवशक्ति स्वयं सहायता समूह की यह सफलता कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि सही योजनाएँ सही हाथों तक पहुँचें तो स्थायी परिवर्तन संभव है।

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