बिलासपुर। एंटी चिट्टा अवेरनेस वॉकथान कार्यक्रम में जिला के भाजपा विधायकों को निमंत्रण ना देने पर भड़के बिलासपुर विधायक त्रिलोक जमवाल, कहा सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रमों का राजनीतिकरण कर रही प्रदेश सरकार, चिट्टे के खिलाफ संदिग्ध युवकों को रोकने व चैकिंग मामले को लेकर लघट महिला मंडल की सदस्यों पर एफआईआर की भी त्रिलोक जमवाल ने की निंदा कहा मामले में संलिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही ना करने व एफआईआर वापिस ना लेने पर 30 दिसंबर को भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा धरना देने की कही बात.
नशे के विरुद्ध हिमाचल सरकार की व्यापक और सशक्त मुहिम चिट्टा मुक्त हिमाचल एक संकल्प, एक दिशा के अंतर्गत 26 दिसंबर को बिलासपुर में महा वॉकथान का आयोजन किया गया था जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया. वहीं अब इस एंटी चिट्टा अवेरनेस वॉकथान को लेकर बिलासपुर सदर विधायक त्रिलोक जमवाल ने सवाल खड़े कर दिए हैं. सर्किट हाउस बिलासपुर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल ने कहा कि सामाजिक सरोकार से जुड़े एंटी चिट्टा अवेरनेस कार्यक्रम का सरकार ने राजनीतिकरण कर दिया जिसका प्रमाण यह है की इस कार्यक्रम में सम्मलित होने के लिए जिला के तीनों भाजपा विधायकों की निमंत्रण तक नहीं दिया गया है जबकि भाजपा विधायकों ने सरकार की इस मुहिम का खुलकर स्वागत किया था. साथ ही विधायक त्रिलोक जमवाल ने कहा कि महिला मंडल लघट की सदस्यों द्वारा चिट्टे के खिलाफ मुहिम छेड़ते हुए संदिग्ध युवकों को रोक कर इसकी सूचना बरमाणा पुलिस को दी मगर पुलिस टीम ने संदिग्धों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए महिला मंडल की पांच महिलाओं के ही खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की जिसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है, जिसकी भाजपा कड़ी निंदा करती है और इस तरह की कार्यवाही से सरकार की करनी व कथनी में अंतर स्पष्ट होता है. साथ ही उन्होंने महिला मंडल द्वारा चिट्टे के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम की सराहना करते हुए ईनाम के तौर पर महिला मंडल को 20 हजार रुपये की राशि देने की बात कही है. वहीं विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मामले में संलिप्त पुलिसकर्मियों को पुलिस स्टेशन से जल्द हटाया जाए व उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाए, साथ ही महिलाओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापिस भी ली जाए, अगर ऐसा नहीं होता तो 30 दिसंबर को सदर भाजपा कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर धरना देंगे, जिसकी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी.