शिमला। शिमला आइस स्केटिंग क्लब की ओर से वीरवार को पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में शिमला के 12 स्कूलों के 42 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता को जूनियर और सीनियर वर्ग में बांटा गया था।
सीनियर वर्ग में सेंट एडवर्ड्स स्कूल के अक्षत तंवर ने प्रथम स्थान हासिल किया। सेंट एडवर्ड्स स्कूल के अक्षज तेगवान दूसरे और सेंट थॉमस स्कूल की कायरा तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं, जूनियर वर्ग में सेक्रेड हार्ट स्कूल के क्रिदय चौहान ने पहला स्थान प्राप्त किया। सेंट एडवर्ड्स स्कूल के हृदयांश लोहमी दूसरे और स्वर्ण पब्लिक स्कूल की कशिश तीसरे स्थान पर रहीं।
जूनियर वर्ग में कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘सीजन्स ऑफ शिमला’, जबकि कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ शिमला’ विषय रखा गया था। जूनियर विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों में शिमला के विभिन्न मौसमों को दर्शाया। वहीं, सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों ने पुराने और वर्तमान शिमला के बदलते स्वरूप को अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से प्रदर्शित किया।
प्रतियोगिता में चैप्सली स्कूल, सेंट थॉमस स्कूल, जेसीबी पब्लिक स्कूल, शिमला पब्लिक स्कूल, सेक्रेड हार्ट स्कूल, स्वर्ण पब्लिक स्कूल, लॉरेट पब्लिक स्कूल, ऑकलैंड हाउस स्कूल फॉर गर्ल्स, शैलेट डे स्कूल, लोरेटो कॉन्वेंट तारा हॉल स्कूल, सेंट एडवर्ड्स स्कूल और दयानंद पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सुषमा शर्मा और जमुना गुरुंग ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
क्लब की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए, जबकि विजेताओं और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को ट्रॉफी व पेंटिंग से संबंधित उपहार प्रदान किए गए।
आइस स्केटिंग क्लब के सचिव रजत मल्होत्रा ने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को मंच देने के लिए इस तरह की प्रतियोगिताएं समय-समय पर आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह प्रतियोगिता का दूसरा वर्ष है। पिछले वर्ष 32 विद्यार्थियों ने भाग लिया था, जबकि इस वर्ष संख्या बढ़कर 42 हो गई है।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में जलवायु और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास भी किया जा रहा है। ‘ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ शिमला’ विषय के माध्यम से विद्यार्थियों ने पुराने शिमला और तेजी से बदलते शहरी स्वरूप के बीच अंतर को अपनी कलाकृतियों में उकेरा। उन्होंने कहा कि शिमला को कंक्रीट के जंगल में बदलने के बजाय इसकी प्राकृतिक और पहाड़ी पहचान को बनाए रखना जरूरी है।