शिमला -मंत्री राजेश धर्माणी ने राष्ट्रीय गान को लेकर चल रहे विवाद पर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में जो कहा, वह बिल्कुल सच है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के लिए आदेश दिए जाने के बाद सभी सदस्य सावधान मुद्रा में खड़े हुए थे और राष्ट्रगान का पूरा सम्मान किया गया।
राजेश धर्माणी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगान शुरू होने से ठीक पहले और समाप्त होने के तुरंत बाद भाजपा के नेताओं, जिनमें विपिन सिंह परमार भी शामिल थे, ने यह बात उठाई कि सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान की बजाय राष्ट्रगीत से होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने गृह मंत्रालय की अधिसूचना का हवाला दिया, लेकिन सवाल यह है कि राष्ट्रगान के तुरंत बाद राष्ट्रगीत की बात उठाने का संदेश क्या जाता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों ही सम्मान के प्रतीक हैं। देश की आजादी के आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों ने ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के माध्यम से देश के लिए बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशनों में भी आजादी से पहले राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गाए जाते रहे हैं।
धर्माणी ने कहा कि राष्ट्रगान की बजाय राष्ट्रगीत गाए जाने की बात करना दोनों की तुलना करने जैसा है और इससे गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि जिस अधिसूचना का भाजपा नेता हवाला दे रहे हैं, उसमें ऐसा कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है कि विधानसभाओं में पहले राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान में से कौन सा गाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह व्यवस्था राज्य विधानसभाओं की परंपरा पर छोड़ी गई है।
मंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने भी स्पष्ट कर दिया है कि सदन में वही प्रक्रिया अपनाई गई जो विधानसभा की स्थापित परंपरा के अनुसार है। उन्होंने भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि इस मामले में किसी को माफी मांगनी चाहिए तो भाजपा को मांगनी चाहिए, क्योंकि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की तुलना करके विवाद खड़ा करने का प्रयास किया गया।
राजेश धर्माणी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह ऐसे मुद्दों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों का सम्मान होना चाहिए और इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।