नई दिल्ली। श्रम एवं रोज़गार और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री, डॉ. मनसुख मांडविया ने आज गुजरात के वटवा में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय के नवनिर्मित भविष्य निधि भवन का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम अहमदाबाद (पश्चिम) के संसद सदस्य दिनेश मकवाना; अमराईवाड़ी, अहमदाबाद के विधायक डॉ. हसमुखभाई पटेल; और मणिनगर, अहमदाबाद के विधायक अमूलभाई भट्ट, वरिष्ठ अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति में हुआ।
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस अवसर संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि नई बिल्डिंग सिर्फ़ भौतिक अवसंरचना नहीं है, बल्कि यह “आस्था का केंद्र” है, भरोसे का प्रतीक है। राष्ट्र निर्माण में ईपीएफओ की भूमिका की जानकारी देते हुए उन्होंने करोड़ों मज़दूरों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में संगठन के योगदान का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, “आज ईपीएफओ के पास ₹28 लाख करोड़ का फंड है और यह 8.25% सालाना ब्याज देता है। अगर मज़दूरों का पैसा ईपीएफओ के पास है, तो यह भारत सरकार की गारंटी के साथ है।” नए कार्यालय को “श्रमिक का मंदिर” कहते हुए उन्होंने कहा, “जब हम ईमानदारी से, मूल्यों पर टिके रहकर काम करेंगे, तभी हम सच में अपने देश की श्रम शक्ति का सम्मान करेंगे।”
कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने देश भर में ईपीएफओ सेवाओं को मज़बूत करने के लिए कई बड़े सुधारों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सभी आने वाले और कई मौजूदा ईपीएफओ आर्यालयों को आधुनिक, प्रौद्योगिकी से लैस, पासपोर्ट-सेवा-केंद्र-स्टाइल सिंगल-विंडो सर्विस सेंटर में बदला जा रहा है। इससे नागरिक देश भर में किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय में ईपीएफ से जुड़े किसी भी मुद्दे को हल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रायोगिक परियोजना चल रही है। डॉ. मांडविया ने कहा कि आगे चलकर, कोई भी लाभार्थी अपने मुद्दे किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय में हल करवा सकेगा, जिससे उसे संबंधित विशेष कार्यालय में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी जिससे वह पहले जुड़ा हुआ था।
डॉ. मांडविया ने यह भी कहा कि कर्मचारियों, विशेषरूप से पहली बार इस्तेमाल करने वालों और डिजिटल सिस्टम से अनजान लोगों के लिए एक्सेस बढ़ाने के लिए, सरकार जल्द ही ईपीएफ सुविधा प्रदाताओं की व्यवस्था शुरू करेगी। ये सुविधा प्रदाता अधिकृत फैसिलिटेटर होंगे जो लाभ पाने और मुद्दों को हल करने में सदस्यों का मार्गदर्शन करेंगे। इस प्रकार से वे नागरिकों और ईपीएफओ के बीच पुल का काम करेंगे।

यह देखते हुए कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों का पैसा निष्क्रिय खातों में फंसा हुआ है, डॉ. मांडविया ने इस बात पर बल दिया कि ईपीएफओ अब ऐसे खातों के लिए मिशन-मोड केवाईसी सत्यापन करेगा। इसके साथ ही सही दावेदार को आसान क्लेम फाइलिंग और बिना किसी परेशानी के सेटलमेंट के लिए विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगे चलकर, भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण के प्रावधान शामिल होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भारत लौटने के बाद भी अपने पीएफ योगदान को बनाए रख सकें और लाभ पा सकें, जैसा कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के मामले में देखा गया है।