Mandi.शिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत बाबा भूतनाथ के मक्खन श्रंगार से होती है । तारारात्रि से शुरू यह शिवरात्रि तक बाबा श्रंगार शिव के अलग अलग रुपों में किया जाता है। इसी कड़ी में चौथे स्वरुप में नीलकंठ महादेव बंदेलखंड के स्वरुप में बाबा भूतनाथ का श्रंगार किया गया। बाबा भूतनाथ दयानंद सरस्वती ने कहा कि बुंदेलखंड ऐतिहासिक कालिंजर किले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर आस्था और स्थापत्य का अद्भुत संगम है जिसमे पौराणिक मान्यता है कि विषपान के पश्चात भगवान शिव ने इसी स्थान पर तपस्या की थी, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ा। उन्होंने कहा कि चंदेल शासकों द्वारा निर्मित इस मंदिर में आज भी प्राकृतिक जलस्रोत से शिवलिंग का अभिषेक होता है और शिवलिंग से पसीना रिसने का चमत्कार भक्तों को अचंभित कर देता है।