संस्कृति मंत्रालय 2026 के गणतंत्र दिवस पर ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर झांकी प्रस्तुत करेगा

शिमला। संस्कृति मंत्रालय 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर एक झांकी प्रस्तुत करेगा, जिसमें राष्ट्रीय गीत को भारत की सभ्यतागत स्मृति, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता की एक जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में दिखाया जाएगा।

इस विषय(थीम) की जानकारी देते हुए संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत की गणतंत्र दिवस झांकियां सिर्फ औपचारिक प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र की सभ्यतागत स्मृति के चलते-फिरते अभिलेख होती हैं। हर वर्ष, ये झांकियां विचारों, मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों को एक साझा दृश्य भाषा में रूपांतरित करती हैं और यह पुनः स्थापित करती हैं कि संस्कृति गणराज्य का सिर्फ एक अलंकरण मात्र नहीं है, बल्कि उसकी जीवंत आत्मा है। इसी निरंतर परंपरा में वंदे मातरम् का स्थान विशिष्ट और शाश्वत है।

उन्होंने कहा कि एक समय क्रांतिकारियों के ओठों पर गूंजने वाला और कारागारों, सभाओं तथा जुलूसों में गाया जाने वाला वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है। श्री अरबिंदो ने इसमें ऐसी आध्यात्मिक शक्ति देखी थी जो सामूहिक चेतना को जगाने में सक्षम थी—एक ऐसा विजन जिसे इतिहास ने सच साबित किया है। वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने राष्ट्र को ‘माता’ के रूप में कल्पित किया गया—सुजलाम्, सुफलाम्—जो प्रकृति, पालन-पोषण और आंतरिक शक्ति से परिपूर्ण है। औपनिवेशिक काल में इसने आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित किया, भक्ति को साहस में, कविता को संकल्प में बदला और भारतवासियों को क्षेत्र, भाषा और धर्म से परे एक साझा स्वतंत्रता की आकांक्षा में एकजुट किया।

संस्कृति मंत्रालय की 2026 की गणतंत्र दिवस झांकी इस लंबी और बहुआयामी यात्रा को एक सशक्त दृश्य रूप प्रदान करती है। झांकी में चलते हुए ट्रैक्टर पर वंदे मातरम् की मूल पांडुलिपि प्रदर्शित की गई है, जिसके पीछे भारत के चारों दिशाओं से आए लोक कलाकार हैं, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दिखा रहे हैं। झांकी के केंद्र में वर्तमान पीढ़ी को ‘जेन-जी’ के रूप में दर्शाया गया है, जो विष्णुपंत पगनिस की ऐतिहासिक प्रस्तुति से प्रेरित होकर वंदे मातरम् गा रही है। राग सारंग में उनके द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह संस्करण, जिसमें औपनिवेशिक सेंसरशिप से बचने के लिए पदों के क्रम में परिवर्तन किया गया था, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कलात्मक प्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया।

वर्ष 2021 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए) को संस्कृति मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी की परिकल्पना और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन वर्षों में आईजीएनसीए ने भारत की दार्शनिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नींव पर आधारित थीम तैयार किया है और उन्हें एक ऐसे दृश्य माध्यम से पेश किया है जो सभी पीढ़ियों को पसंद आते हैं और उनके बीच संवाद स्थापित करते हैं। वर्ष 2026 की झांकी भी इसी विजन को आगे बढ़ाती है और वंदे मातरम् को सिर्फ एक ऐतिहासिक रचना नहीं, बल्कि नैतिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक प्रेरणा के सतत स्रोत के रूप में स्थापित करती है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय की झांकी किसी एक मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व ही नहीं करती, बल्कि देश की सामूहिक भावनाओं, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड के लिए संस्कृति मंत्रालय की झांकी का विषय(थीम) ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ तय किया गया है, जो कलात्मक अभिव्यक्ति के जरिए राष्ट्रीय गीत की प्रेरणादायक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा को दिखाएगी।

डॉ. जोशी ने यह भी बताया कि पिछले छह वर्षों से आईजीएनसीए संस्कृति मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी को परिकल्पित करने और उसे बनाने की ज़िम्मेदारी संभाल रहा है। जबकि अधिकांश मंत्रालय और राज्य अपनी विशिष्ट उपलब्धियों या कार्यक्रमों को प्रदर्शित करते हैं, वहीं संस्कृति मंत्रालय एक अलग तरीका अपनाते हुए विविध सांस्कृतिक आयामों को एक साथ समाहित करता है—-और यही विजन वर्ष 2026 के लिए ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय(थीम) में परिलक्षित होता है।

जब भारत गणतंत्र दिवस 2026 का उत्सव मनाएगा, तब वंदे मातरम् देश से सिर्फ आजादी को स्मरण करने का ही नहीं, बल्कि उसके योग्य बने रहने का भी आह्वान करेगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय राष्ट्रीय गीत को भारत की एकता, सांस्कृतिक गहराई और शाश्वत चेतना के प्रतीक के रूप में पुनः स्थापित करना चाहता है—जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को वर्तमान की जिम्मेदारियों और भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है।

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