भारत की फिनटेक गाथा को न केवल प्रौद्योगिकी की गाथा के रूप में बल्कि महिला-पुरूष समानता आधारित न्याय की गाथा के रूप में भी याद किया जाना चाहिए: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

नई दिल्ली। राष्ट्रपति  मुर्मु ने ओडिशा के भुवनेश्वर में ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के सहयोग से ओडिशा सरकार द्वारा आयोजित ब्लैक स्वान समिट, इंडिया की शोभा बढ़ाई।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि हम ऐसे युग में जी रहे हैं जब प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है। नए आविष्कार इतनी तेजी से सामने आ रहे हैं कि हमारी प्रणालियां, कौशल और कारोबारी मॉडल अक्सर इनके साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रहे हैं। साथ ही, ये तीव्र प्रगति साइबर सुरक्षा संबंधी जोखिमों, डीपफेक, भ्रामक सूचना और प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता सहित कई गंभीर चुनौतियां भी ला सकती हैं। हालांकि, तीव्र तकनीकी परिवर्तनों का नवाचार और विकास पर बहुत बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ब्लैक स्वान समिट जैसे आयोजनों के माध्यम से, कौशल विकास के द्वारा क्षमताओं को और भी अधिक बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और डिजिटल एवं वित्तीय परिवर्तन को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु नवीन तरीकों का पता लगाया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की वित्तीय प्रणाली एक प्रभावशाली क्रांति की साक्षी रही है। किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं के बीच बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान बहुत आम हो गए हैं। उनके लिए, “फिनटेक” केवल एक तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि यह उनकी जीवनरेखा बन गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की फिनटेक की कहानी को न केवल प्रौद्योगिकी की गाथा के रूप में, बल्कि महिला-पुरूष समानता आधारित न्याय की गाथा के रूप में भी याद किया जाना चाहिए। महिलाएं एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं जिन पर फिनटेक को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। फिनटेक इको-सिस्‍टम को उन्हें केवल अंतिम उपयोगकर्ताओं के रूप में ही नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र की हस्तियों, पेशेवरों और उद्यमियों के रूप में भी देखना चाहिए। प्रत्येक नए प्लेटफॉर्म, उत्पाद या नीति के लिए यह मूल्यांकन करना आवश्यक है कि क्या यह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय इको-सिस्टम में सक्रिय भागीदार बनाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वित्तीय प्रौद्योगिकी अपने आप में समावेशन की गारंटी नहीं देती। विशेषकर दूरस्थ, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी ऐसे नागरिक हैं जो डिजिटल उपकरणों से परिचित नहीं हैं। उन्हें कौशल प्रदान करना विकास यात्रा में भागीदार बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। तभी वित्तीय प्रौद्योगिकी समावेशन, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक माध्यम बन सकती है। उन्होंने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रौद्योगिकी सामाजिक न्याय और समावेशन का एक साधन बने।

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