नई दिल्ली। बीज की गुणवत्ता को विनियमित करने और नकली बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए, बीज अधिनियम, 1966, बीज नियम, 1968 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 राज्य सरकारों को बीज निरीक्षकों की नियुक्ति करने का अधिकार देते हैं जो बीज केंद्रों का निरीक्षण कर सकते हैं, सैंपल ले सकते हैं और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, स्टॉक जब्त करने, बिक्री रोकने के आदेश देने और अभियोजन चलाने जैसी प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में बीजों की ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए बीज प्रमाणीकरण, ट्रेसिबिलिटी एवं समग्र सूची (साथी) पोर्टल भी लॉन्च किया जो नकली/घटिया बीजों के प्रसार को रोकने में मदद करता है। भारत सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मौजूदा कानूनी ढांचे के सख्त क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी भी जारी करती है, ताकि नकली/घटिया बीजों की बिक्री को रोकने के लिए डीलरों/खुदरा विक्रेताओं के भंडारण और बिक्री केंद्रों पर निगरानी बढ़ाई जा सके।
पारंपरिक किस्म के बीजों की सुरक्षा के लिए पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 और ‘जैव विविधता अधिनियम, 2002’ के तहत पारंपरिक और किसान किस्मों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के प्रावधान पहले से ही उपलब्ध हैं। किसानों के पास अपने खेत में उगाए गए बीजों को सुरक्षित रखने, उपयोग करने, बोने, पुन: बोने, विनिमय करने, साझा करने या बेचने का अधिकार है।
यह जानकारी राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने एक लिखित उत्तर में दी।