आयुष डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए भारत के स्वदेशी आयुष मॉडलों का लाभ उठाया जाएः सचिव, आयुष मंत्रालय

नई दिल्ली। इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 में केंद्रीय आयुष मंत्रालय के पैवेलियन में दर्शकों, नवोन्मेषकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का तांता लगा रहा। इन सब ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए मंत्रालय के कृत्रिम मेधा (एआई) समर्थित समाधानों के बारे में जानकारी प्राप्त की। पैवेलियन में एआई चालित चैटबॉट्स और योगा पॉस्चर एआई ने खास तौर से काफी दिलचस्पी पैदा की। कंप्यूटर दृष्टि आधारित समाधान योगा पॉस्चर एआई उपयोगकर्ताओं को योग आसनों के आकलन, सुधार तथा अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से अभ्यास में समर्थ बनाता है।

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आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) के महानिदेशक वैद्य रविनारायण आचार्य और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित वस्तुओं का अवलोकन किया जो डिजिटल पहलकदमियों और प्रौद्योगिकी समर्थित जन स्वास्थ्य टूल्स की झांकी पेश करते हैं। श्री कोटेचा ने आयुष क्षेत्र में सेवा डिलीवरी, अनुसंधान, शिक्षण और प्रशासन को मजबूत करने के लिए तैयार किए गए प्रौद्योगिकी संचालित हस्तक्षेपों के सुव्यवस्थित और प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए आयुष ग्रिड टीम की सराहना की। आयुष सचिव ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सर्वम एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, मेटा और गूगल समेत अन्य प्रमुख संस्थाओं की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और सारगर्भित संवाद किए।

कोटेचा ने नागरिकों, चिकित्सकों और संस्थानों की सहायता के लिए विकसित एआई आधारित चैटबॉट्स की व्यावहारिक उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पारंपरिक स्वास्थ्यसेवा की संरचना में डिजिटल बुद्धिमता को शामिल करने के मौजूदा प्रयासों को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने स्वास्थ्यसेवा के कायाकल्प के लिए स्वदेशी एआई क्षमताओं के रणनीतिक महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डाटा की प्रामाणिकता, समावेशिता और वैश्विक अंतरसंचालनीयता को सुनिश्चित करते हुए आयुष डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए भारत के स्वदेशी एआई मॉडलों का लाभ उठाया जाना चाहिए। आयुष सचिव ने कहा कि मापनीय और जनकेंद्रित स्वास्थ्यसेवा समाधानों की रचना के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ कृत्रिम मेधा को जिम्मेदारी पूर्वक जोड़ा जाना चाहिए।

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