नई दिल्ली। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम में भाग ले रहे छात्रों के 11वें बैच के साथ वर्चुअल माध्यम से बातचीत की। इस बैच का आयोजन 9 से 22 फरवरी, 2026 तक सिक्किम विश्वविद्यालय में किया जा रहा है, जिसमें चंडीगढ़ के 22 और तमिलनाडु के 15 छात्र शामिल हैं। इस सत्र में सचिव एमडीओएनईआर, संयुक्त सचिव एमडीओएनईआर, सिक्किम विश्वविद्यालय, गंगटोक के रजिस्ट्रार (प्रभारी) और उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम उत्तर पूर्वी परिषद के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित और वित्त पोषित एक यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम है, जिसे राष्ट्रीय एकता को गहरा करने और देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम आपसी समझ और सहयोगात्मक भावना को पुख्ता करने की परिकल्पना करता है। यह 14 दिवसीय विसर्जन प्रवास, शैक्षणिक सत्रों, विरासत दौरों और स्थानीय सामुदायिक संवाद के माध्यम से सार्थक युवा-से-युवा जुड़ाव, सांस्कृतिक सराहना और आपसी समझ को बढ़ावा देता है। कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के भ्रमण और अनुभव के लिए 28 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 32 बैचों में 1280 छात्रों की भागीदारी की परिकल्पना की गई है। अब तक पिछले दस बैचों में विभिन्न राज्यों के 390 छात्र इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं। वर्तमान में चल रहे दो बैचों में 81 छात्र हिस्सा ले रहे हैं। (अनुलग्नक देखें।)
केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि किस प्रकार इस कार्यक्रम को लड़कों और लड़कियों की समान भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है, जो समावेशिता और सशक्तिकरण के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने अष्टलक्ष्मी दर्शन को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत एक अनूठा सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान बताया, जो शेष भारत के युवाओं को आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। यह उन्हें क्षेत्र की भाषाओं, परंपराओं और जीवन शैली का अनुभव करने में मदद करता है और साथ ही विविधता में एकता की भावना को गहरा करता है। पूर्वोत्तर भारत में पर्यटन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यह पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने सिक्किम में पर्यटन की विशाल संभावनाओं की ओर भी इशारा किया।

संवाद के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने कई छात्रों से उनके अनुभवों और सीख के बारे में पूछा। तमिलनाडु की सुश्री कीर्तना पी ने कहा कि यह एक शानदार अवसर था और इसने सार्थक वास्तविक जीवन की सीख प्रदान की। तमिलनाडु के एक दिव्यांग छात्र श्री अंसारी ए ने इस अवसर के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम के अपने समग्र अनुभव के बारे में चंडीगढ़ की सुश्री राजनप्रीत कौर ने कहा कि वह इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर गहराई से सम्मानित महसूस कर रही हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिक्किम में पर्यावरण और विकास साथ-साथ चलते हैं।
अपने समापन संबोधन में, केंद्रीय मंत्री ने छात्रों के उत्साह की प्रशंसा की और उनसे सिक्किम के लोगों, परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता के अनुभवों को अपने परिवार और दोस्तों के साथ व्यापक रूप से साझा करने तथा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वे राज्य की समृद्ध संस्कृति और विरासत की कई कहानियों के साथ घर वापस लौटेंगे। अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण छात्रों को पूर्वोत्तर भारत की प्रामाणिक संस्कृति, लोगों और परंपराओं का अनुभव करने में मदद करना है।