शिमला, नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में नगर निगम मेयर के कार्यकाल को लेकर जमकर हंगामा हुआ। इस दाैरान भाजपा और कांग्रेस पार्षदों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सदन की शुरू होने से पहले ही भाजपा पार्षदों ने मेयर के सदन चलाने को लेकर सवाल उठाए। भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने पूछा कि मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने वाले विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, ऐसे में वह किस हैसियत से सदन का संचालन कर रहे हैं। इस पर दोनों और से जमकर नारेबाजी और बहसबाजी हुई। भाजपा व कांग्रेस पार्षदों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।
थोड़ी देर बाद जब फ़िर से कांग्रेस के पार्षदों सहित मेयर ने बैठक शुरू की, लेकिन विपक्ष ने फिर सदन में हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस को महिला विरोधी करार देते हुए भाजपा पार्षदों ने मेयर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान मेयर गुस्सा भी हुए और कृष्णानगर के पार्षद बिट्टू पन्ना को सस्पेंड करने की बात कही। हंगामे के बीच मेयर ने सदन की कार्यवाही शुरू की लेकिन भाजपा के पार्षद नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर आ गए।
नगर निगम पार्षदों का कहना है कि मेयर को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। कांग्रेस महिला विरोधी है क्योंकि अढ़ाई साल बाद मेयर पद पर महिला को बिठाया जाना था, लेकिन मेयर पद पर बने हुए हैं। ऊपर से भाजपा पार्षदों को सस्पेंड करने की बात कर रहे हैं। जबकि मेयर के पास ये अधिकार ही नहीं है।
यहां सनद रहे कि शिमला नगर निगम के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले पर कोर्ट में सुनवाई 2 मार्च को है।याचिकाकर्ताओं की ओर पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया है कि मेयर की नियुक्ति को तत्काल रद्द कर दिया जाए। सरकार ने मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से 5 वर्ष बढ़ाने को लेकर जो ऑर्डिनेंस राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था, उसकी समय सीमा 6 जनवरी को खत्म हो गई है। अध्यादेश खत्म होने के बाद मेयर पद पर बने नहीं रह सकते हैं। मेयर का ढाई साल का कार्यकाल 14 नवंबर को खत्म हो गया था, उसके बाद रोस्टर के अनुसार महिला को यह सीट आरक्षित थी। ऐसे में मेयर अपने पद पर नहीं बने रह सकते और नगर निगम को तय रोस्टर के मुताबिक चुनाव करवाने होंगे। इसी मामले की लेकर शुक्रवार को सदन में जमकर हंगामा हुआ।