उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री के निर्माण के लिए एनआईईएलआईटी डिजिटल रिकॉर्डिंग स्टूडियो की स्थापना की गई

नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने नई दिल्ली के एनआईईएलआईटी भवन में एनआईईएलआईटी डिजिटल रिकॉर्डिंग स्टूडियो का उद्घाटन किया। इस अवसर पर एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. एम. एम. त्रिपाठी भी उपस्थित थे। एमईआईटीवाई की एडटेक पहल के अंतर्गत एनआईईएलआईटी डिजिटल रिकॉर्डिंग स्टूडियो की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल सामग्री निर्माण को सुदृढ़ करना और देश भर में प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है। यह स्टूडियो एनआईईएलआईटी राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय (एनडीयू) प्लेटफॉर्म के लिए एक प्रमुख सामग्री विकास केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा, जो डिजिटल कौशल विकास और शिक्षा के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच के रूप में उभर रहा है।

एस. कृष्णन ने इस अवसर पर अपने संबोधन में विशेष रूप से दूर-दराज़ और पिछड़े क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास को बढ़ावा देने में एनआईईएलआईटी की अनूठी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एनआईईएलआईटी की मजबूत उपस्थिति का उल्लेख किया। पूर्वोत्तर राज्य की अपनी यात्रा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एनआईईएलआईटी से प्रशिक्षित बड़ी संख्या में उम्मीदवार राज्य सचिवालय में कार्यरत हैं, जो स्थानीय कार्यबल को मजबूत करने और सुशासन प्रणाली को सहयोग देने में एनआईईएलआईटी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के मज़बूत प्रभाव को दर्शाता है।

एस. कृष्णन ने संस्थान के संस्थापकों की दूरदृष्टि का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी जब उद्योग के अनुकूल एम.टेक और डिप्लोमा कार्यक्रम डिजाइन और व्यावहारिक कौशल पर केंद्रित थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनआईईएलआईटी ने अपने कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालते हुए एक व्यापक संस्थान के रूप में विकास किया है जो सभी स्तरों के शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करता है।

एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. एम. एम. त्रिपाठी ने कहा कि डिजिटल रिकॉर्डिंग स्टूडियो से एनआईईएलआईटी की आंतरिक सामग्री निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और देश भर में बड़े पैमाने पर कौशल विकास पहलों को समर्थन मिलेगा।

इस कार्यक्रम में चाणक्य विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), साइबर सुरक्षा संघ (सीएसएआई), पवन दुग्गल एसोसिएट्स, नीति अनुसंधान और शासन केंद्र (सीपीआरजी), जिंदल स्टील लिमिटेड, वर्चु टेक प्राइवेट लिमिटेड सहित 12 प्रमुख संगठनों के साथ 12 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ। उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में उद्योग-संचालित कौशल विकास, नवाचार और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए लिमिटेड, विवेकानंद व्यावसायित अध्ययन संस्थान – तकनीकी परिसर (वीआईपीएस-टीसी), जेपी सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, एसकेडी विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और हैक्टिवस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (एडज़ा एआई) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

इन सहयोगों का मुख्य उद्देश्य उद्योग-अनुकूल कौशल विकास और प्रशिक्षण को मजबूत करना, उभरती प्रौद्योगिकियों में पाठ्यक्रम विकास और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना, अनुसंधान, नवाचार और परामर्श पहलों को प्रोत्साहित करना तथा देश भर के शिक्षार्थियों के लिए क्षमता निर्माण, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटीके बारे में

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी), भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) की एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है, जो कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण में अग्रणी रही है।

एनआईईएलआईटी ने 56 एनआईईएलआईटी केंद्रों, 750 से अधिक मान्यता प्राप्त संस्थानों और 9,000 से अधिक सुविधा केंद्रों के माध्यम से अपनी व्यापक उपस्थिति के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों में लाखों विद्यार्थियों को कुशल और प्रमाणित किया है।

एनआईईएलआईटी को शिक्षा मंत्रालय द्वारा विशिष्ट श्रेणी के अंतर्गत “मानद विश्वविद्यालय” का दर्जा दिया गया है। इसका मुख्य परिसर रोपड़ (पंजाब) में है और इसके ग्यारह घटक परिसर आइजोल, अगरतला, औरंगाबाद, कालीकट, गोरखपुर, इम्फाल, इटानगर, अजमेर (केकरी), कोहिमा, पटना और श्रीनगर में स्थित हैं। इसका उद्देश्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक्स और आईसीटी क्षेत्र में उच्च शिक्षा में क्रांति लाना है।

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