“मेक इन इंडिया” पहल के तहत किए गए अन्य प्रमुख उपायों में स्टार्ट-अप इंडिया, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, जीआईएस-सक्षम भूमि बैंक, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति सुधार, बहु-माध्यमीय अवसंरचना की समेकित योजना हेतु पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की स्थापना में बाधाओं को दूर करने के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप, औद्योगिक पार्कों की स्थापना, व्यवसाय सुगमता में सुधार के उपाय, अनुपालन बोझ में कमी के उपाय, श्रम कानूनों का युक्तिकरण, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत, सार्वजनिक खरीद आदेशों के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियां तथा चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) शामिल हैं।
मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं 14 प्रमुख क्षेत्रों में लागू की गई हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (एलएसईएम), आईटी हार्डवेयर, औषधि, बल्क ड्रग्स, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरियां, सोलर पीवी मॉड्यूल, दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, विशेष इस्पात, श्वेत वस्तुएं तथा ड्रोन एवं ड्रोन कंपोनेंट्स शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त उत्पादन और बिक्री को प्रोत्साहित किया गया है। पीएलआई योजनाओं ने चिन्हित क्षेत्रों में नए निवेश को बढ़ावा दिया है और विनिर्माण क्षमता के विस्तार में सहयोग किया है।
पीएलआई योजनाओं के तहत 31 दिसम्बर 2025 तक 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है। इन योजनाओं के अंतर्गत किए गए निवेश से 31 दिसम्बर 2025 तक 20.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन और बिक्री हुई है। इसके अतिरिक्त, इन योजनाओं के परिणामस्वरूप 14.39 लाख से अधिक (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) रोजगार सृजित हुए हैं, और पीएलआई ढांचे के अंतर्गत शामिल सभी 14 क्षेत्रों में कुल 836 आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
भारत में विभिन्न क्षेत्रों में पीएलआई योजनाओं का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। इन योजनाओं ने घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने, निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजन करने तथा कई रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान वास्तविक निवेश, उत्पादन में वृद्धि और रोजगार सृजन का विवरण परिशिष्ट-II में संलग्न है। पीएलआई के अंतर्गत राज्य-वार आंकड़ों का केन्द्रीकृत रूप से रखरखाव नहीं किया जाता है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को समर्थन देने के लिए, केन्द्र सरकार विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों के माध्यम से राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों के प्रयासों को पूरक बनाती है। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित योजनाएं और कार्यक्रम शामिल हैं:-
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी): पीएमईजीपी के तहत गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए अधिकतम मार्जिन मनी सब्सिडी 35 प्रतिशत तक प्रदान की जाती है। इस योजना में विनिर्माण इकाइयों के लिए परियोजना लागत 50 लाख रुपये तक और सेवा इकाइयों के लिए 20 लाख रुपये तक निर्धारित है।
- सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना: यह योजना सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए गए ऋणों पर क्रेडिट गारंटी प्रदान करने हेतु क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से लागू की जाती है। इस योजना के तहत गारंटी कवरेज की अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये है।
- आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) फंड: यह फंड एमएसएमई में इक्विटी फंडिंग के रूप में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए स्थापित किया गया है, जिसमें सरकार द्वारा 10,000 करोड़ रुपये तथा निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल फंड्स के माध्यम से 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बजट 2026-27 में भी 2021 में स्थापित इस फंड को और मजबूत करने के लिए 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की गई है, ताकि सूक्ष्म उद्यमों को निरंतर समर्थन मिल सके और उनकी जोखिम पूंजी तक पहुंच बनी रहे।
- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) डिजिटल अवसंरचना को एक उपयोगिता के रूप में, मांग पर शासन और सेवाएं, नागरिकों और एमएसएमई का डिजिटल सशक्तिकरण जैसी सेवाएं प्रदान करता है। एमएसएमई विभिन्न प्लेटफॉर्मों के माध्यम से डिजिटल भुगतान भी करते हैं।
निवेश आकर्षित करने और राज्यों तथा विभिन्न क्षेत्रों में समग्र विकास के लिए अनुकूल इकोसिस्टम उपलब्ध कराने हेतु, केन्द्र सरकार राज्य सरकारों के सहयोग से विभिन्न योजनाओं को लागू करती है, जैसे कि राष्ट्रीय ओद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उन्नति, जम्मू और कश्मीर के लिए नई केन्द्रीय क्षेत्र योजना, स्टार्टअप इंडिया।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के तहत भारत भर में विभिन्न ग्रीनफील्ड औद्योगिक इलाकों/क्षेत्रों/नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और निवेश गंतव्य बनाए जा सकें। अब तक एनआईसीडीपी के तहत लगभग 20 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके अलावा, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। वर्तमान में भारत में 306 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क मौजूद हैं, और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी)द्वारा अतिरिक्त 20 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क और स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं।
उन्नति (उत्तर-पूर्व परिवर्तनकारी औद्योगीकरण) योजना के तहत उद्योगों को क्षेत्रीय अवसंरचना को सुदृढ़ करने, रोजगार सृजन करने तथा पूर्वोत्तर राज्यों में लचीलापन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए समर्थन प्रदान किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत पूंजी निवेश प्रोत्साहन (सीआईआई), पूंजी ब्याज सब्सिडी (सीआईएस) तथा विनिर्माण एवं सेवा आधारित प्रोत्साहन (एमएसएलआई) जैसे लाभ प्रदान किए जाते हैं।
जम्मू और कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए, सरकार केन्द्रीय क्षेत्र की नई योजना (एनसीएसएस), 2021 को 28,400 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान के साथ लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य नए निवेश को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत पूंजी निवेश प्रोत्साहन (सीआईआई), पूंजी ब्याज सब्सिडी (सीआईएस), वस्तु एवं सेवा कर आधारित प्रोत्साहन (जीएसटीएलआई) तथा कार्यशील पूंजी ब्याज सब्सिडी (डब्ल्यूसीआईएस) जैसे प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने रोजगार सृजन, रोजगार क्षमता बढ़ाने और सभी क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दी है। 99,446 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ, यह योजना 2 वर्षों की अवधि में देश में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती है। इनमें से 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार कार्यबल में प्रवेश करने वाले होंगे।
सरकार प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को भी लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य उद्योग-संबंधी कौशल को बढ़ाना, नौकरी के लिए तत्परता में सुधार करना और भारत की अग्रणी कंपनियों एवं संस्थानों में संरचित इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावसायिक अनुभव प्रदान करना है। पायलट परियोजना के प्रथम चरण में 1.81 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया, और साझेदार कंपनियों ने 60,000 से अधिक उम्मीदवारों को 82,000 से अधिक इंटर्नशिप ऑफर दिए। द्वितीय चरण में 2.14 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया, और साझेदार कंपनियों ने 71,000 से अधिक उम्मीदवारों को 83,000 से अधिक इंटर्नशिप ऑफर प्रदान किए।
सरकार विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को सुगम बनाने और प्रोत्साहित करने के लिए व्यवसाय सुगमता में सुधार तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु अनेक उपाय कर रही है। इनमें नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, जीआईएस-सक्षम भूमि बैंक, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति सुधार, बहु-माध्यमीय अवसंरचना की समेकित योजना के लिए पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान तथा प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की स्थापना में बाधाओं को दूर करने के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप शामिल हैं।
यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज राज्यसभा में दी।
परिशिष्ट-I
राज्यसभा के लिखित प्रश्न संख्या 3880 के भाग (क) से (ग) के उत्तर के संदर्भ में उल्लिखित परिशिष्ट (27.03.2026 को उत्तर हेतु)
विनिर्माण क्षेत्र
- एयरोस्पेस और रक्षा
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स
- फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण
- जैव प्रौद्योगिकी
- पूंजीगत वस्तुएं
- वस्त्र और परिधान
- रसायन और पेट्रो रसायन
- इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम)
- चमड़ा एवं जूते-चप्पल
- खाद्य प्रसंस्करण
- रत्न और आभूषण
- जहाजरानी
- रेलवे
- निर्माण
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा
सेवा क्षेत्र
- सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं (आईटी और आईटीई)
- पर्यटन और आतिथ्य सेवाएं
- चिकित्सा मूल्य यात्रा
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेवाएं
- लेखांकन और वित्तीय सेवाएं
- ऑडियो-विजुअल सेवाएं
- विधिक सेवाएं
- संचार सेवाएं
- निर्माण एवं संबंधित इंजीनियरिंग सेवाएं
- पर्यावरणीय सेवाएं
- वित्तीय सेवाएं
- शिक्षा सेवाएं
परिशिष्ट -II
राज्यसभा के लिखित प्रश्न संख्या 3880 के भाग (क) से (ग) के उत्तर के संदर्भ में उल्लिखित परिशिष्ट (27.03.2026 को उत्तर हेतु)
पीएलआई योजनाओं के अंतर्गत वास्तविक निवेश, उत्पादन में वृद्धि तथा रोजगार सृजन का विवरण
| विवरण/वर्ष | वित्त वर्ष 2022-23 तक | वित्त वर्ष 2023-24 तक | वित्त वर्ष 2024- 2025 तक | वित्त वर्ष 2025-26*
तक |
| निवेश | 0.51 लाख करोड़ | 1.18 लाख करोड़ | 1.76 लाख करोड़ | 2.16 लाख करोड़ |
| बिक्री/उत्पादन | 4.50 लाख करोड़ | 9.71 लाख करोड़ | 16.50 लाख करोड़ | 20.41 लाख करोड़ |
| रोजगार | 3 लाख | 8 लाख | 12 लाख | 14.39 लाख |
31 दिसम्बर 2025 तक