सीएसआईआर ने वित्तीय शासन में नया मानदंड स्थापित किया; लगातार तीसरे वर्ष सीएजी को पहले ही दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक खाते प्रस्तुत किए

नई दिल्ली। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने लगातार तीसरे वर्ष न केवल नए वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने वार्षिक खाते तैयार किए हैं, बल्कि उन्हें 30 जून, 2026 की समय सीमा से तीन महीने पहले, 1 अप्रैल को भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) को प्रस्तुत भी कर दिया है।

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निर्धारित समय से काफी पहले इस कार्य को पूरा करके, सीएसआईआर ने वित्तीय प्रबंधन, सुशासन और अनुपालन के क्षेत्र में एक नया प्रतिमान स्थापित किया है। सीएसआईआर-अकाउंट्स मैनेजर सॉफ्टवेयर (एएमएस) की सफलता की कहानी में सरकारी संगठनों में अनुकरणीयता की अपार संभावनाएं हैं, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक उत्कृष्टता के प्रति सीएसआईआर की अनुकरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह उपलब्धि सीएसआईआर के महानिदेशक/डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी के मार्गदर्शन और सीएसआईआर/डीएसआईआर के अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री चेतन प्रकाश जैन के नेतृत्व में अधिकारियों की एक आंतरिक टीम द्वारा विकसित एएमएस के कार्यान्वयन से संभव हुई है। इसे सीएसआईआर मुख्यालय और देश भर में फैली इसकी 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में लागू किया गया है।

अपनी आंतरिक डिजिटल पहलों को जारी रखते हुए, सीएसआईआर ने 1 अप्रैल, 2026 को सीएसआईआर परचेज सॉफ्टवेयर (सीपीएस) लॉन्च करके सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में खरीद प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत, पारदर्शी और कुशल डिजिटल प्लेटफॉर्म की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य संपूर्ण खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही लाना है, जिसे उसी आंतरिक विकास टीम द्वारा विकसित किया गया है।

इस प्रकार, सीएसआईआर भारत सरकार के डिजिटल इंडिया, पारदर्शिता और जवाबदेही के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए समर्पित रूप से काम कर रहा है।

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