शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण कानून पहले ही अस्तित्व में है, जिसे सभी दलों के समर्थन से पास किया गया था। ऐसे में अब संशोधन विधेयक लाने और उसे लेकर विपक्ष को महिला विरोधी बताना पूरी तरह गलत है।
नरेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस और पूरे विपक्ष ने हमेशा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का समर्थन किया है और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से इसे लागू करने की मांग भी उठाई थी। उन्होंने सवाल किया कि जब कानून पहले ही बन चुका था, तो सरकार ने इसे 2024 में लागू क्यों नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा और विपक्ष को विश्वास में लिए इस संशोधन को जल्दबाजी में लाना चाहती थी। संसद सदस्यों को विधेयक का मसौदा केवल कुछ घंटे पहले दिया गया, जिससे व्यापक चर्चा संभव नहीं हो पाई।
नरेश चौहान ने कहा कि देश में जनगणना की प्रक्रिया जारी है और उसके आधार पर ही सही आंकड़े सामने आएंगे। ऐसे में परिसीमन जैसे अहम विषय पर जल्दबाजी करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे राज्यों और दक्षिणी राज्यों पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर बहस की जरूरत थी, जिसे नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन विधेयक 54 वोटों के अंतर से गिरा है, जो दर्शाता है कि सरकार की मंशा को लेकर विपक्ष और अन्य दलों में गंभीर आशंकाएं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन के जरिए 2029 के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी।
नरेश चौहान ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और पूरा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में पहले भी था और आज भी पूरी मजबूती से इसके समर्थन में खड़ा है।