नई दिल्ली। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने शिमला, हिमाचल प्रदेश में ‘प्रोजेक्ट दीपक’ का 66वां स्थापना दिवस मनाया, जो पश्चिमी हिमालय के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में छह दशकों से अधिक की समर्पित सेवा का प्रतीक है।
हिमाचल प्रदेश के शिमला, किन्नौर, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जैसे प्रमुख जिलों में कार्यरत ‘प्रोजेक्ट दीपक’ बीआरओ की सबसे पुरानी परियोजनाओं में से एक है। यह प्रोजेक्ट ऐतिहासिक हिंदुस्तान-तिब्बत रोड के निर्माण और मनाली-लेह के महत्वपूर्ण हिस्सों को विकसित करने में अग्रणी रहा है। रणनीतिक सड़क नेटवर्क के निर्माण, उन्हें बेहतर बनाने और रखरखाव में इस परियोजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे न केवल दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क सुनिश्चित हुआ है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में भी बहुमूल्य योगदान मिला है।
बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ, इस परियोजना ने आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के प्रति भी असाधारण प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान इस प्रोजेक्ट के तहत कई सफल बचाव अभियान चलाए गए हैं। विशेष रूप से, मई 2023 में बीआरओ की टीमों ने बारालाचा ला दर्रे पर फंसे लगभग 300 वाहन चालकों को सुरक्षित निकाला था। वहीं, जुलाई 2023 में एक बेहद चुनौतीपूर्ण और ऊँचाई वाले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान चंद्रताल से 250 से अधिक नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला गया।
वर्ष 1961 में स्थापित यह परियोजना देश के सबसे दुर्गम इलाकों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायक रही है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऊँचाई वाले क्षेत्रों और सीमावर्ती सड़कों सहित 1,100 किलोमीटर से अधिक के सड़क नेटवर्क की जिम्मेदारी संभालते हुए इस परियोजना ने रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई है। दुर्गम ऊँचाइयों वाले इलाकों में संचार की महत्वपूर्ण कड़ियों को बनाए रखने और सैन्य ऑपरेशनल तैयारी सुनिश्चित करने में यह प्रोजेक्ट रक्षा बलों को निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।