दलित होने की वजह से मेरे साथ किया जा रहा भेदभाव : पार्षद बिट्टू पाना,,मेयर ऑफिस से निकाला बाहर, शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं महापौर

सैहब कर्मियों की हड़ताल खत्म करवाने में विफल, मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए लगाई निजी गाड़ियां : आरोप

Shimla । शिमला नगर निगम में कृष्णानगर वार्ड से पार्षद बिट्टू पाना ने महापौर सुरेंद्र चौहान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम में उनके साथ दलित होने की वजह से भेदभाव किया जा रहा है। बिट्टू पाना ने आरोप लगाया कि बीते दिन जब वह सैहब कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी समस्याओं को लेकर महापौर से मिलने मेयर कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें ऑफिस से बाहर जाने के लिए कह दिया गया।
उन्होंने कहा कि यह व्यवहार न केवल एक जनप्रतिनिधि का अपमान है, बल्कि दलित समाज के प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता को भी दर्शाता है। उनके साथ इससे पहले भी हाउस के अंदर भी इसी मंशा के साथ कार्यवाई की गई बिट्टू पाना ने कहा कि उनके वार्ड कृष्णानगर के अधिकांश सैहब कर्मी पिछले छह दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, लेकिन महापौर इस गंभीर मसले को हल करने के बजाय उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।
पार्षद ने आरोप लगाया कि शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन और महापौर समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी महापौर द्वारा सैहब कर्मियों को बैठक के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनसे बातचीत नहीं की गई। इतने गंभीर मुद्दे को छोड़कर महापौर क्रिकेट मैच खेलने में व्यस्त रहे, जो उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
बिट्टू पाना ने यह भी आरोप लगाया कि शहर में कूड़ा उठाने के लिए निजी गाड़ियों को लगाया गया है, जिससे महापौर अपने करीबी मित्रों को लाभ पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए, लेकिन यहां जनहित की बजाय निजी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने मांग की कि सैहब कर्मियों की मांगों पर तुरंत सकारात्मक निर्णय लिया जाए और शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.