शिमला। आंजभोज क्षेत्र में जनसेवा, सामाजिक सरोकार और साफ-सुथरी राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले जी. एस. तोमर आज भी लोगों के बीच सम्मान और विश्वास का प्रतीक बने हुए हैं। मीडिया जगत और राज्य स्तरीय राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले जी. एस. तोमर ऐसे परिवार से संबंध रखते हैं, जिसने वर्षों तक केवल टोंरु गांव ही नहीं बल्कि पूरे आंजभोज क्षेत्र को अपनी सेवाओं और समर्पण से मजबूत किया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वर्गीय एस. एस. तोमर, के. एस. तोमर और अब जी. एस. तोमर ने हमेशा समाज सेवा को अपना धर्म माना। इस परिवार ने कभी भी जनसेवा को लाभ या राजनीतिक स्वार्थ की दृष्टि से नहीं देखा, बल्कि लोगों की भलाई और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी।
गांव के वरिष्ठ नागरिकों, बुद्धिजीवियों और आम जनता के आग्रह पर जी. एस. तोमर ने अपने जीवन का पहला प्रत्यक्ष चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें इस चुनाव में सफलता नहीं मिली, लेकिन क्षेत्र की जनता का मानना है कि इस चुनाव ने उनकी ईमानदार छवि और साफ राजनीति को और मजबूत किया। चुनावी अनुभव ने उन्हें यह भी सिखाया कि कठिन समय में वास्तव में कौन साथ खड़ा रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जी. एस. तोमर में राजनीति के लिए आवश्यक साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की कोई कमी नहीं है। इतिहास भी इस बात का गवाह है कि कई बड़े नेता अपने शुरुआती चुनावों में सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने हार को अंत नहीं माना। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Abraham Lincoln का उदाहरण देते हुए लोग कहते हैं कि शुरुआती असफलता भविष्य की बड़ी सफलता का रास्ता भी बन सकती है।
आंजभोज क्षेत्र की जनता आज भी जी. एस. तोमर से भविष्य में बड़ी उम्मीदें रखती है। लोगों का मानना है कि उनकी साफ छवि, स्पष्ट सोच और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई पहचान दिला सकती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि राजनीति में ऐसे ईमानदार और जनसेवा के लिए समर्पित लोगों की हमेशा आवश्यकता रहेगी।