भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने यूपीएल समूह की कंपनियों और अन्य के पुनर्गठन से संबंधित प्रस्तावित संयोजन को मंजूरी दी

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने यूपीएल समूह की कंपनियों और अन्य के पुनर्गठन से संबंधित प्रस्तावित संयोजन को मंजूरी दी है।

प्रस्तावित संयोजन में निम्नलिखित पक्ष शामिल हैं:

  1. यूपीएल लिमिटेड (यूपीएल 1),
  2. यूपीएल सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशंस लिमिटेड (यूपीएल एसएएस),
  3. यूपीएल ग्लोबल सस्टेनेबल एग्री सॉल्यूशंस लिमिटेड (यूपीएल 2),
  4. यूपीएल क्रॉप प्रोटेक्शन होल्डिंग्स लिमिटेड (केमैन 1),
  5. टीपीजी अपस्विंग लिमिटेड (टीपीजी),
  6. प्लैटिनम जैस्मीन ए 2018 ट्रस्ट (अपने न्यासी, प्लैटिनम आउल सी 2018 आरएससी लिमिटेड के माध्यम से कार्यरत) (प्लैटिनम),
  7. वुडहॉल होल्डिंग्स (डीआईएफसी) लिमिटेड (डब्ल्यूएचएल)।

प्रस्तावित संयोजन एक पुनर्गठन है जिसके परिणामस्वरूप यूपीएल 1 के दो व्यावसायिक क्षेत्रों, अर्थात् (i) भारत फसल संरक्षण व्यवसाय (यूपीएल एसएएस के अंतर्गत) (भारत सीपीसी व्यवसाय); और (ii) वैश्विक फसल संरक्षण व्यवसाय (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से (अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से) केमैन 1 के अंतर्गत) (वैश्विक सीपीसी व्यवसाय) का यूपीएल 2 (यूपीएल 1 की एक अन्य पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) में स्थानांतरण होगा।

यूपीएल लिमिटेड एक वैश्विक कृषि समाधान कंपनी है जो कीटनाशकों, सूक्ष्म पोषक तत्वों, फसल सुरक्षा उत्पादों, जैव-समाधानों, बीजों और फसल कटाई के बाद के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास, निर्माण और बिक्री में लगी हुई है।

यूपीएल एसएएस फसल संरक्षण व्यवसाय का प्रबंधन करती है और भारत में फसल संरक्षण तथा बीज उपचार उत्पादों सहित कृषि समाधानों की आपूर्ति करती है।

यूपीएल 2 का वर्तमान में भारत में कोई व्यावसायिक परिचालन नहीं है और इसका उद्देश्य लेनदेन पूरा होने के बाद भारत और वैश्विक फसल सुरक्षा व्यवसायों दोनों को संभालना है।

केमैन 1 वर्तमान में वैश्विक फसल सुरक्षा व्यवसाय का संचालन करती है और पारंपरिक फसल सुरक्षा उत्पादों और जैव समाधानों में कारोबार करती है।

टीपीजी इंक. प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी, उपभोक्ता और वित्तीय सेवा क्षेत्रों पर केंद्रित वैश्विक निवेश फर्म है।

वुडहॉल होल्डिंग्स (डीआईएफसी) लिमिटेड ब्रुकफील्ड ग्रुप से संबंधित एक वैकल्पिक निवेश प्रबंधन कंपनी है।

आयोग का विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।

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