सांगला. किन्नौर के रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में सतत एवं सामुदायिक आधारित ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इको-टूरिज्म सोसाइटी की कार्यकारिणी समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक रकछम में आयोजित की गई। बैठक में छितकुल, रकछम और बटसेरी पंचायतों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों, युवक मंडलों, महिला मंडलों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
बैठक में क्षेत्र में ईको-टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने और पर्यटन के सतत प्रबंधन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने नवगठित इको-टूरिज्म सोसाइटी की भूमिका और उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य लक्ष्य जिम्मेदार पर्यटन को प्रोत्साहित करना, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना तथा पर्यटन से होने वाले लाभ को स्थानीय समुदाय और क्षेत्र के विकास से जोड़ना है।
बैठक के दौरान रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य की जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव संपदा के संरक्षण पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने माना कि बढ़ते पर्यटन दबाव के बीच पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भविष्य में अभयारण्य क्षेत्र में आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों से ईको-टूरिज्म शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए रकछम, छितकुल और बटसेरी में प्रवेश बिंदुओं पर बैरियर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसे उपस्थित सदस्यों ने समर्थन दिया।
बैठक में बताया गया कि ईको-टूरिज्म शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग क्षेत्र की स्वच्छता, पर्यटक सुविधाओं के विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर ईको-टूरिज्म गतिविधियों को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि स्थानीय पंचायतें, वन्यजीव विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर सांगला घाटी की प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श और सतत पर्यटन मॉडल विकसित करेंगे।