राज्य सरकार ने 3336 करोड़ रुपये की बिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौते हस्ताक्षरित किए,,मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की उपलब्धि को सराहा

शिमला। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष के दौरान लगभग 3336 करोड़ रुपये लागत की 278 मेगावाट क्षमता की 19 जल विद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौते हस्ताक्षरित किए हैं। इनमें 9 मेगावाट की सोयल डाशल, 6 मेगावाट की खौली-2, 9 मेगावाट की ग्रामांग, 10 मेगावाट की उमली, 24 मेगावाट की भरमौर चरण-1, 21 मेगावाट की भरमौर चरण-2, 22.5 मेगावाट की हरसर, चरण-2, 19 मेगावाट की हरसर, चरण-3, 24 मेगावाट की टुंडह चरण-2, 18 मेगावाट की जंगलिक, 15 मेगावाट की रूपिन चरण-2, 17 मेगावाट की दुनाली-1 एवं 2, 12 मेगावाट की जरी, 18 मेगावाट की तोरल कुंडली, 15 मैगावाट की टुंडन, 10 मेगावाट की कोट डोगरी, 8 मेगावाट की अप्पर कुर्मी, 11 मेगावाट की कलाल खोल और 9.6 मेगावाट की मेलन विद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।
प्रदेश सरकार ने यह भी पाया कि पहले से आवंटित 15 विद्युत परियोजनाओं के निर्माणकर्त्ताओं ने परियोजना के कार्यान्वयन में कोई विशेष रूचि नहीं दिखाई तथा सरकार ने इन परियोजनाओं का आवंटन रद्द कर दिया। सरकार पुनः इनके त्वरित कार्यान्वयन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं आमंत्रित करने के लिए प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों के लिए विभाग अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में विद्यमान विद्युत क्षमता के दोहन के लिए सरकार कृत संकल्प है। उन्होंने ऊर्जा विभाग की इस क्षमता के त्वरित दोहन के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऊर्जा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति में संशोधन करते हुए 25 मेगावाट क्षमता तक की जल विद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी दरों में बदलाव कर 40 वर्षों के लिए एक समान 12 प्रतिशत कर दिया है।
उन्होंने कहा कि 150 मैगावाट की टिडोंग, चरण-1 जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। प्रदेश सरकार ने जियो थर्मल विद्युत परियोजना के अन्वेषण व विकास के लिए जियो ट्रॉपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। प्रदेश में विद्यमान लगभग 24000 मेगावाट विद्युत क्षमता में से राज्य द्वारा 12588 मेगावाट क्षमता की 189 परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 1528 मेगावाट क्षमता की 54 परियोजनाएं निर्माणधीन हैं तथा 7539 मेगावाट क्षमता की 526 परियोजनाएं स्वीकृति के विभिन्न चरणों में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार विद्युत क्षमता के दोहन को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश को आर्थिक तौर पर समृद्ध किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इन परियोजनाओं में प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखकर ही समझौता ज्ञापन कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *