गुलेरी जयंती के अवसर पर शिमला के गेयटी थियेटर में साहित्यक आयोजन

शिमला.. भाषा एवं संस्कृति विभाग जिला शिमला द्वारा प्रदेश की महान विभूतियों की जयंतियों का नियमित रूप से आयोजन करवाया  जा रहा है ताकि उनके द्वारा अपने अपने क्षेत्र में समाज के पथ प्रदर्शन की दिशा में किए गए महत्वपूर्ण योगदान का वर्तमान तथा आने वाली पीढ़ी को समर्थ स्मरण रहे और उनके द्वारा दर्शाए गए पथ का अनुसरण करें  तथा युवा लेखकों  को विभागीय  गतिविधियों  से जोड़ने के उद्देश्य से एक ऐसी ही विभूति बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी की जयंती के  उपलक्ष्य पर ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के  सम्मेलन कक्ष में कवि सम्मेलन का आयोजन करवाया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी केआर भारती ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ तथा हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के माननीय सदस्य एवं संस्कृत के प्रकांड विद्वान व साहित्यकार डॉ०मस्त राम शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में   उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मंच संचालन का कार्य साहित्यकार त्रिलोक सूर्यवंशी ने किया।
मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलन व गुलेरी को पुष्पांजली अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । आयोजक द्वारा मुख्य अतिथि, अध्यक्ष व विशिष्ट अतिथि को हिमाचली टोपी और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
मूर्धन्य साहित्यकार पंडित चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ के साहित्यिक योगदान को स्मरण करना तथा हिंदी भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित कवि सम्मेलन का आगाज़
वन्दना राणा  की  कविता हाल जमाने दा पहाड़ी रचना से हुआ ,कवि भूप रंजन ने  प्राश्चित कविता, वसुंधरा धर्माणी ने पिता बरगद है, ओम प्रकाश ने गुलेरी के जीवन के व्यक्तित्व व  कृतत्व पर  दोहावली प्रस्तुत  की।
गुप्तेश्वत नाथ उपाध्याय ने मैं कविता लिखता हूं,उमा ठाकुर गुलेरी जयंती पर कविता, कल्पना गांगटा ने साहित्यकार व नशावृत्ति  स्नेहलता नेगी ने  दौर नया है, राधासिंह ने मैं स्त्री हूं में स्त्री के त्याग व समर्पण का वर्णन कियाहै। कौशल्या ठाकुर हम हिमाचली है कवि से हिमाचल की महिमता गुणगान किया, वीरेंद्र शर्मा सच केवल सच में  का वर्णन किया।  जगमोहन शर्मा ने अपनी रचना में हिमाचल में  बढ़ते कंक्रीट के  जंगल में पर्यावरण  के होते हुए नुकसान की चिंता व्यक्त की  । जगदीश कश्यप ने सावित्री बाई फुले  रचना आमजन के लिए शिक्षा  की लो पर प्रकाश डाला।
एस आर हरनोट ने  कलम और पहाड़ों पर सत्ताएं रचनाओं के माध्यम से समाज में घटित होने वाली घटनाओं पर तंज किया। त्रिलोक सूर्यवंशी ने उसने कहा था  कहानी के सौ वर्षों सफ़र को  प्रस्तुत किया।
सरला शर्मा मां हूं पिता  नहीं ,डॉ विजय लक्ष्मी नेगी ने झुकना जरूरी नहीं , आत्मरंजन ने  जिद्द और कविता रचनाओं से सामाजिक व्यवस्था पर गहरा तंज किया।   डॉ मस्त राम शर्मा ने संस्कृत में चण्डिका तथा पहाड़ी बोली में नठे जो गांव ते  कविता में गांव से होते पलायन पर अपनी  चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर 30से अधिक कवियों ने कविता पाठ किया जिसमें सलील शमशेर, सुनील कुमार शर्मा, पूजा सूद डोगर, जया शर्मा डॉ० जयपाल ठाकुर ने मैं आदमी खरीदता हूं तथा हंसना मना है रचना से सभी हो खूब गुदगुदाया ।
कार्यक्रम के अध्यक्ष सुदर्शन वशिष्ठ ने गुलेरी जी की रचनाओं और उनकी विलक्षण प्रतिभा के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा अध्यक्षीय टिप्पणी में सभी कवियों की रचनाओं की सराहना की तथा जब से गई बुआ परदेश बदलते कविता से रिश्तों के मिजाज पर तंज किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने शानदार आयोजन की सराहना की तथा गुलेरी जी के निबंध  लड्डू और कछुआ धर्म पर अपनी बात रखीतथा आधी -अधूरी कहानी लहना सिंह की आपसी, जोड़ा हुआ सोना व व्यंग्य पर  भी चर्चा की।
इस अवसर पर  अनिल हारटा ,सहायक निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग,  जिला भाषा अधिकारी शिमला, सरोजना नरवाल, देवभूमि हिम कला मंच के देवेंद्र कुमार देव, शिवम ठाकुर  सहित  दर्जनों श्रोता भी उपस्थित रहे।