हिमाचल में 25 साल बाद लॉटरी होगी शुरू, 1-डिजिट पर बैन ,सरकार की आर्थिक संकट से उबरने की कवायद के बीच विपक्ष का तीखा प्रहार

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से बंद पड़ी लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और सख्त नियमों के दायरे में चलाने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके तहत वित्त विभाग के निदेशालय कोषागार, लेखा एवं लॉटरी ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी बेचने के लिए सोल सेलिंग एजेंट नियुक्त करने का ई-टेंडर जारी कर दिया है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय पर्वों यानी 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को कोई ड्रॉ नहीं निकाला जाएगा। इसके अलावा, सभी ड्रॉ प्रदेश के सार्वजनिक स्थानों पर जजों, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और अधिकृत अधिकारियों की सीधी देखरेख में पारदर्शी तरीके से आयोजित होंगे।

​ प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था दोबारा शुरू करने को लेकर संसदीय कार्य एवं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि कैबिनेट के फैसले के बाद उनकी अध्यक्षता में एक सब-कमेटी बनाई गई थी, जिसमें अनिरुद्ध सिंह और धनवानी भी शामिल थे। इस कमेटी ने सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही कैबिनेट को लॉटरी शुरू करने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि पंजाब, केरल और असम जैसे राज्यों में लॉटरी से भारी राजस्व मिल रहा है, जहां पंजाब अकेले सालाना करीब 100 करोड़ रुपये कमाता है। हिमाचल में 2004 के आसपास लॉटरी बंद की गई थी, लेकिन वर्तमान में राज्य वित्तीय संकट से गुजर रहा है। चूंकि हिमाचल के लोग पहले से दूसरे राज्यों की लॉटरी खेल रहे थे और राज्य को कोई फायदा नहीं हो रहा था, इसलिए यह कदम उठाया गया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि गरीबों को नुकसान पहुंचाने वाली ‘सिंगल डिजिट’ या रोज खुलने वाली लॉटरी शुरू नहीं होगी, बल्कि केवल 3-4 तरह की उच्च स्तरीय बंपर लॉटरी ही लाई जाएगी। इसके नियम और SOP अधिसूचित कर दिए गए हैं, जिससे शुरुआत में 10 करोड़ और आगे चलकर 100 से 150 करोड़ रुपये सालाना राजस्व मिलने की उम्मीद है।

​ दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल देवभूमि है और भाजपा सरकार के दौरान लॉटरी बंद करने की मुख्य वजह यही थी कि इससे लोगों के घर, जमीन और गहने तक बिक जाते थे। उन्होंने लॉटरी की लत की तुलना ‘चिट्टे’ (नशे) से करते हुए कहा कि एक बार इसकी आदत पड़ने पर इंसान अपना सब कुछ गंवा बैठता है। प्रदेश में पहले से ही नशा फैल रहा है, ऐसे में सरकार को इसे रोकने पर ध्यान देना चाहिए, न कि लॉटरी के रूप में बर्बादी का नया रास्ता खोलना चाहिए। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस फैसले से राज्य के आर्थिक हालात नहीं सुधरेंगे, बल्कि कुछ चुनिंदा कंपनियों और लोगों को फायदा पहुंचेगा, जो आने वाले समय में जांच का विषय बनेगा।