नई दिल्ली। आयुर्वेद वैश्विक स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चाओं में हाशिए से निकलकर अब मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है। भारत की विस्तारित आयुष अर्थव्यवस्था, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के घरेलू स्तर पर बढ़ते उपयोग तथा वेलनेस और चिकित्सा मूल्य यात्रा में बढ़ती रुचि आयुर्वेद के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। इसी के साथ वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय भी पारंपरिक चिकित्सा, अनुसंधान और प्रमाणों पर अधिक जोर दे रहा है।
भारत में 23 सितम्बर, 2026 को 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे समय में यह अवसर विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” है। यह ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारत अपनी सदियों पुरानी ज्ञान प्रणाली को आधुनिक अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ढांचों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। अब चुनौती केवल आयुर्वेद को दुनिया तक पहुंचाने की नहीं है, बल्कि ऐसे प्रमाण, विश्वसनीयता और संस्थागत आधार तैयार करने की है, जो इसके जिम्मेदार वैश्विक विस्तार को समर्थन दे सकें।
पिछले एक दशक में आयुष क्षेत्र ने उल्लेखनीय आर्थिक विस्तार देखा है, जिससे आयुर्वेद के विकास और व्यापक स्वीकार्यता के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है। आयुष बाजार वर्ष 2014 में 2.85 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2023 में 43.4 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि इसी अवधि में आयुष निर्यात 1.09 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। सरकार की पहलों में एमएसएमई और स्टार्टअप को सशक्त बनाने पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में उद्यमिता, नवाचार और निवेश के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम विकसित करने में मदद मिली है।
आयुष पद्धतियों की घरेलू स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता इस विस्तार के लिए एक और महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा जुलाई 2022 से जून 2023 के दौरान आयुष पर किए गए पहले विशेष अखिल भारतीय सर्वेक्षण में 1,81,298 परिवारों को शामिल किया गया, जिनमें 1,04,195 ग्रामीण और 77,103 शहरी परिवार थे। सर्वेक्षण में ग्रामीण क्षेत्रों में 94.8 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 96 प्रतिशत आयुष जागरूकता दर्ज की गई। इसमें यह भी पाया गया कि पिछले 365 दिनों के दौरान 46.3 प्रतिशत ग्रामीण निवासियों और 52.9 प्रतिशत शहरी निवासियों ने उपचार या रोकथाम के लिए आयुष का उपयोग किया था। उपचार के लिए आयुर्वेद सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली आयुष पद्धति के रूप में उभरा, जो इसके मजबूत घरेलू आधार तथा निवारक स्वास्थ्य देखभाल और वेलनेस में इसके योगदान की संभावनाओं को दर्शाता है।
भारत चिकित्सा मूल्य यात्रा के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती वैश्विक मांग का लाभ उठाने का भी प्रयास कर रहा है। आयुष पद्धतियों के तहत उपचार की तलाश करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए 27 जुलाई, 2023 को एक समर्पित आयुष वीजा शुरू किया गया। सरकार ने आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की संभावनाओं वाले पर्यटन सर्किटों की पहचान करने के लिए भारत पर्यटन विकास निगम के साथ भी साझेदारी की है। वर्ष 2022 में 115.6 अरब अमेरिकी डॉलर का अनुमानित वैश्विक चिकित्सा मूल्य यात्रा बाजार वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग 286.1 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। ऐसे में आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां स्वास्थ्य सेवाओं, वेलनेस सुविधाओं और पर्यटन को एक साथ जोड़कर भारत के चिकित्सा मूल्य यात्रा और वेलनेस इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण घटक बन सकती हैं।
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल नीति आयोग द्वारा जुलाई 2026 में “आयुर्वेद को वैश्विक बनाने के लिए रणनीतिक रोडमैप” जारी किया जाना है। वर्ष 2047 तक की दीर्घकालिक रूपरेखा के रूप में तैयार यह रोडमैप विनियमन एवं मानकों, अनुसंधान, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, निर्यात, ब्रांडिंग और चिकित्सा मूल्य यात्रा पर केन्द्रित है। इसमें गुणवत्ता मानकों, मजबूत बुनियादी ढांचे, विश्वसनीय अनुसंधान, प्रशिक्षित पेशेवरों, एकरूप गुणवत्ता वाले उत्पादों और ऐसे नियामक ढांचों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझा और मान्यता दी जा सके। यह रोडमैप आयुर्वेद के जिम्मेदार विस्तार तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी सेवाओं और उत्पादों के प्रति अधिक विश्वास पैदा करने के लिए आवश्यक संस्थागत और गुणवत्ता संबंधी इकोसिस्टम विकसित करने का प्रयास करता है।