नई दिल्ली। Frontiers in Medicine में हाल ही में प्रकाशित एक बड़े बहु–केंद्रित क्लिनिकल अध्ययन में पाया गया है कि 24 सप्ताह तक अश्वगंधा मूल अर्क (Ashwagandha Root Extract) के दैनिक सेवन से लिवर या किडनी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
20 अगस्त 2026 को प्रकाशित इस अध्ययन (Front. Med., Vol 13, 20 August 2026. https://doi.org/10.3389/fmed.2026.1852954) का शीर्षक “Safe prolonged prophylactic use and tolerability of Ashwagandha following COVISHIELD™ vaccination over 24 weeks: a multicentre randomised double-blind placebo-controlled trial” है। यह अध्ययन 09 संस्थानों के 45 शोधकर्ताओं की बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया, जिसमें केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर, Ayush Centre of Excellence, Translational Health Science and Technology Institute, Centre for Complementary and Integrative Health तथा Interdisciplinary School of Health Sciences, Savitribai Phule Pune University सहित अन्य संस्थान शामिल थे।
अध्ययन में आयुर्वेद, क्लिनिकल मेडिसिन, रूमेटोलॉजी, कॉम्प्लीमेंटरी एवं इंटीग्रेटिव हेल्थ तथा संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। रैंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड, प्लेसीबो-नियंत्रित इस क्लिनिकल ट्रायल में 18 से 70 वर्ष की आयु के 1,200 ऐसे स्वस्थ वयस्क शामिल थे, जिन्हें कोविडशील्ड वैक्सीन की पहली, दूसरी या बूस्टर खुराक प्राप्त हुई थी। प्रतिभागियों को यादृच्छिक रूप से प्रतिदिन 500 मिलीग्राम मानकीकृत aqueous अश्वगंधा मूल अर्क, जो 4 ग्राम कच्ची अश्वगंधा जड़ के चूर्ण के बराबर है, अथवा समान प्लेसीबो दिया गया। अध्ययन भारत के सात केंद्रों पर किया गया तथा इसमें क्लिनिकल, प्रयोगशाला और इम्यूनोलॉजिकल आकलन शामिल थे। इस ट्रायल को Clinical Trials Registry–India (CTRI/2021/06/034496) में पंजीकृत किया गया था। (http://www.clinicaltrials.gov)
प्रतिभागियों को 24 सप्ताह तक यह दिया गया और 28 वें सप्ताह तक उनका फॉलो-अप किया गया। अध्ययन में शामिल 1,200 प्रतिभागियों में से 1,032 प्रतिभागियों (86 प्रतिशत) ने अध्ययन पूरा किया।
अध्ययन में 24 सप्ताह की अवधि के दौरान मानकीकृत अश्वगंधा मूल अर्क की अनुकूल सुरक्षा और सहनशीलता प्रोफाइल पाई गई। लिवर और किडनी के कार्य से संबंधित मानक अध्ययन में रिपोर्ट की गई संदर्भ सीमाओं के भीतर रहे। लिवर एंजाइम, बिलीरुबिन, क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया सहित किए गए आकलनों में उपचार से संबंधित लिवर या किडनी की क्षति का कोई प्रमाण नहीं मिला।
अध्ययन में किसी गंभीर प्रतिकूल घटना को अध्ययन में दिए गए हस्तक्षेप से संबंधित नहीं पाया गया तथा प्रतिकूल घटना के कारण किसी भी प्रतिभागी ने अध्ययन से नाम वापस नहीं लिया।