ऊना। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, शुद्ध एवं अद्यतन बनाने के साथ-साथ नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों के तहत अनमैप्ड अथवा तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस प्राप्त करने वाले नागरिकों को दस्तावेज जमा करवाने के लिए निर्वाचन कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) स्वयं मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे तथा उन्हें ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाने के लिए बीएलओ स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध करवाया जाएगा।
ऑनलाइन सुनवाई को दी जाएगी प्राथमिकता
उपायुक्त ने बताया कि असाधारण परिस्थितियों में ही ईआरओ के निर्णय के अनुसार सुनवाई आयोजित की जाएगी। ऐसी स्थिति में भी ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि नागरिकों को कार्यालयों में अनावश्यक रूप से उपस्थित न होना पड़े।
उन्होंने बताया कि यदि कोई मतदाता स्वयं सुनवाई में उपस्थित होने में सक्षम नहीं है, तो वह अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत कर सकता है। इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, अस्वस्थ व्यक्तियों तथा अन्य जरूरतमंद मतदाताओं को सुविधा मिलेगी।
वंचित एवं बेघर वर्गों के लिए विशेष व्यवस्था
उपायुक्त ने बताया कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, निर्धन एवं बेघर व्यक्तियों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए उनकी सुविधा के अनुसार पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित करने के साथ विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने के अधिकार से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा पत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सही ठहराया गया है। वहीं, गैर-एसआईआर अवधि के दौरान मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित संबंधित फॉर्म का उपयोग किया जाएगा।
छूटे हुए एवं नए पात्र मतदाताओं के नामांकन पर विशेष जोर
उपायुक्त ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिन पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज होने से रह गया है अथवा जो युवा पहली बार मतदाता बनने के पात्र हैं, वे ‘सतत अद्यतनीकरण’ के तहत संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने सभी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, सुपरवाइजर्स एवं बीएलओ को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में छूटे हुए पात्र मतदाताओं एवं नए युवा मतदाताओं के शत-प्रतिशत नामांकन के लिए तुरंत विशेष अभियान शुरू करने को कहा।
उपायुक्त ने कहा कि मतदाता सूची का सुदृढ़ीकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पात्र नागरिकों से भी अपील की कि वे मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित करें तथा आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।