शिमला। शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में HPU टीचर वेलफेयर एसोसिएशन का धरना-प्रदर्शन जारी है। आज प्रदर्शन का 54वां दिन है। इस दौरान एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय की स्वायत्ता से जुड़े विधेयक के सभी प्रावधानों का अध्ययन करने और उनके संभावित प्रभावों का तथ्यात्मक विश्लेषण करने की मांग उठाई। इस विधेयक के विरोध में नॉन टीचिंग स्टाफ भी काले रिबन लगाकर काम करते नज़र आए।
इस धरना-प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि पारित विधेयक के प्रत्येक प्रावधान का विस्तार से अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि उसके संभावित प्रभावों का तथ्यात्मक आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की वित्तीय स्वायत्तता को छीनकर असंवैधानिक काम किया जा रहा है। व्यास ने कहा कि HPU का हर साल 252 करोड़ रुपए का खर्च होता है, जबकि सरकार सिर्फ 147 करोड़ रुपए की ग्रांट दे रही है। शेष खर्च HPU अपने स्तर पर पूरा करता है।
HPU टीचर वेलफेयर एसोसिएशन ने आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए पूर्व छात्रों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को भी अभियान से जोड़ने पर जोर दिया है। इसके साथ ही अन्य विश्वविद्यालयों और निष्पक्ष शिक्षाविदों के साथ संवाद स्थापित करने की बात कही गई।
गौरतलब है कि HPU टीचर वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार ने 2 सितंबर को विधानसभा में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त करने वाला विधेयक पारित किया है। एसोसिएशन का कहना है कि विधेयक के सभी प्रावधानों का अध्ययन कर उनके संभावित प्रभावों की जानकारी विश्वविद्यालय समुदाय और आम जनता तक पहुंचाई जाएगी।