शिमला। हिमाचल प्रदेश में भूमि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और पुश्तैनी विरासत का आधार है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जमाबंदी, इंतकाल, निशानदेही और तकसीम जैसी राजस्व सेवाएं आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में राजस्व प्रशासन को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाना सुशासन की दिशा में अहम कदम है।
बीते चार वर्षों में राजस्व विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन कार्यप्रणाली और डिजिटल दस्तावेजों की उपलब्धता में उल्लेखनीय प्रगति की है। ई-हिमभूमि, राजस्व प्रबंधन प्रणाली (आरएमएस), आरसीसीएमएस, भू-नक्शा पोर्टल और माई डीड पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभागीय कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव आया है। इन नीतिगत प्रयासों का उद्देश्य कार्यालयों में केवल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत प्रदान करना और भूमि अभिलेखों को अधिक सटीक, अद्यतन और सुलभ बनाना है।
राजस्व न्यायालयों के आधुनिकीकरण में आरएमएस पोर्टल एक बड़ी उपलब्धि है। एक सितंबर, 2025 से इस पोर्टल को पूर्णतः ऑनलाइन एवं पेपरलेस कार्यप्रणाली के रूप में संचालित किया जा रहा है। 9 सितंबर, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से हिमाचल प्रदेश रेवेन्यू कोर्ट्स ऑनलाइन फाइलिंग एंड प्रोसीजर रूल्स 2025 लागू किए गए, जिससे इस व्यवस्था को विधिक एवं विनयामक आधार भी प्राप्त हुआ।
राजस्व प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से अब तक 2,12,918 राजस्व मामलों को प्रोसेस किया गया। 71,000 मामले सरकार द्वारा सितंबर 2025 को शुरू किए गए पूरी तरह से ऑनलाइन और पेपरलेस रेवेन्यू कोर्ट मॉड्यूल के माध्यम से दर्ज किए गए हैं।
प्रदेश की सभी 479 राजस्व अदालतों को इस डिजिटल प्रणाली से जोड़ दिया गया है और लगभग 28,000 सूची (कॉज लिस्ट) तैयार की गई हैं। साथ ही, इस प्लेटफॉर्म पर लगभग 16,000 अधिवक्ता और 52,000 से अधिक नागरिक भी पंजीकृत हो चुके हैं।
राजस्व मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रत्येक माह के अंतिम दिनों में मासिक लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है। इनमें तकसीम, निशानदेही, राजस्व प्रविष्टियों में दुरुस्ती और अतिक्रमण जैसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों का बोझ कम करना और नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा से राहत देना है।
भूमि अभिलेखों को अद्यतन रखना राजस्व प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी एक है। इस दिशा में विभाग ने लंबित जमाबंदी को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया और अधिकारियों व फील्ड कर्मचारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार काम करने के निर्देश दिए।
इसके परिणामस्वरूप लंबित कार्य में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। लंबित जमाबंदियों की संख्या लगभग 6,500 से घटकर करीब 750 रह गई है। लगभग 5,750 जमाबंदियों को वर्तमान स्थिति के अनुरूप व पिछले पांच वर्षों के दौरान भूमि से संबंधित हुए समस्त लेनदेन पूरी तरह अपडेट कर दिया गया है।
साथ ही, ई-हिमभूमि के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षरित जमाबंदी की सुविधा से नागरिक अब मोबाइल फोन पर प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो रोजगार या शिक्षा के कारण अपने गांव से दूर रहते हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग द्वारा डिजिटल, नागरिक-केंद्रित और जवाबदेह व्यवस्था बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से प्रदेश का राजस्व प्रशासन पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसुविधा सुनिश्चित करने के नए आयाम स्थापित कर रहा है।