
शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए गठित आयोग की पहली बैठक आज यहां आयोग के अध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक के दौरान, प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। आयोग ने प्रदेश में जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उप-तहसीलों, विकास खंडों तथा विभिन्न विभागों की प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा संरचना की समीक्षा की।
आयोग ने प्रशासनिक इकाइयों के सृजन, विलय, विभाजन एवं पुनर्गठन से संबंधित प्रस्तावों के परीक्षण के लिए अपनाए जाने वाले मानदंडों एवं मापदंडों पर प्रारंभिक विचार-विमर्श किया। इस दौरान जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, पहुंच, प्रशासनिक दक्षता तथा जनसुविधा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखने पर बल दिया गया।
बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करना, जनसेवाओं की पहुंच को सुगम बनाना तथा विशेष रूप से प्रदेश के दूरदराज एवं दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करना होना चाहिए।
आयोग ने मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था का समग्र आकलन करने के लिए संबंधित विभागों एवं उपायुक्तों से आवश्यक जानकारी, जनसांख्यिकीय आंकड़े और सुझाव प्राप्त करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। इसके अतिरिक्त जनप्रतिनिधियों, विभिन्न हितधारकों तथा संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श के महत्व पर भी बल दिया गया।
प्रस्तावित पुनर्गठन के संभावित वित्तीय प्रभावों, विशेषकर आधारभूत ढांचे एवं मानव संसाधन की आवश्यकताओं पर भी चर्चा की गई। आयोग ने उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने तथा राज्य के राजकोष पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आयोग ने मौजूदा प्रशासनिक ढांचे का विस्तृत परीक्षण करने तथा विचार-विमर्श की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों एवं जिला प्रशासन से आवश्यक जानकारी और सुझाव प्राप्त करने का निर्णय लिया।
बैठक में आयोग के सदस्य अधिवक्ता विशाल पंवर और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश शर्मा तथा आयोग की सदस्य सचिव एवं हिमाचल प्रदेश भू-अभिलेख की निदेशक तोरुल एस. रवीश, सचिव सामान्य प्रशासन डॉ. यूनुस, विशेष सचिव सामान्य प्रशासन हरबंस सिंह ब्रसकोन उपस्थित थे।