
शिमला। लोक निर्माण विभाग (PWD) में कार्यरत मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) कर्मियों ने प्रदेश सरकार से न्यूनतम वेतन, सेवा शर्तों में सुधार और स्थायी नीति बनाने की मांग उठाई है। इस संबंध में एमटीडब्ल्यू वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात कर उन्हें मांगों का ज्ञापन सौंपा।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि प्रदेशभर में करीब 4832 एमटीडब्ल्यू कर्मी प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मात्र लगभग 6000 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। उनका कहना था कि इतनी कम आय में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद मुश्किल हो गया है। महंगाई के दौर में राशन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य घरेलू खर्च पूरे करना बड़ी चुनौती बन गया है।
शेर सिंह ने कहा कि सरकार को एमटीडब्ल्यू कर्मियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए जल्द ठोस नीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे कर्मियों को सम्मानजनक वेतन, सुरक्षित भविष्य और बेहतर सेवा शर्तें मिलनी चाहिए।
यूनियन ने सरकार के समक्ष चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद दैनिक वेतनभोगी का दर्जा देने, 8-10 घंटे की ड्यूटी के अनुरूप अलग नीति बनाने, 48 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मियों के लिए सुरक्षित भविष्य और ओपीएस जैसी व्यवस्था पर विचार करने, पूरे प्रदेश में वेतन भुगतान की निश्चित तिथि तय करने तथा महिला एमटीडब्ल्यू कर्मियों को मातृत्व अवकाश सहित अन्य सुविधाएं देने की मांग रखी।
इसके अलावा मंडी जिले के दुर्घटना पीड़ित एमटीडब्ल्यू कर्मी देवेंद्र के परिवार को उचित मुआवजा और न्याय देने की भी मांग की गई।
यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के एमटीडब्ल्यू कर्मी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।