लोक गायक परस राम तोमर का निधन, लोक संस्कृति को दी नई पहचान

शिमला। हिमाचली लोक संगीत और रंगमंच जगत के वरिष्ठ कलाकार परस राम तोमर का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
परस राम तोमर का जन्म गांव दाडवा, तहसील कसौली में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध लोक गायक थे और उन्होंने हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1976 में, जब रिकॉर्डर का दौर था, तब उन्होंने हिमाचल प्रदेश में रिकॉर्डेड लोक गीत गाया।

उनका प्रसिद्ध गीत “म्हारे देशा रा दिल हो दिल्लीये, मेरे पहाड़ा रा दिल शिमला”
आज भी लोगों की जुबान पर है और लोक संगीत प्रेमियों के दिलों में बसा हुआ है।
उन्होंने लोक सम्पर्क विभाग, हरियाणा सरकार में ड्रामा इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए लोक रंगमंच के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किया। विशेष रूप से उन्होंने पारंपरिक लोक नाट्य शैली करयाला को नई पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया।

परस राम तोमर का संपूर्ण जीवन लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक संरक्षण को समर्पित रहा। उनके निधन को लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। कला जगत से जुड़े लोगों, स्थानीय कलाकारों और क्षेत्रवासियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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