
नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से दिल्ली में भेंट कर उनके समक्ष हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण की माँग रखी।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “अच्छी सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास का आधार होती हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के बिना विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा है। आज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भेंट कर हिमाचल प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण की माँग को उनके समक्ष रखा। पीएमजीएसवाई योजना ने ग्रामीण अंचलों की तस्वीर-तकदीर बदल कर रख दी है।
प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि सड़क सिर्फ आवाजाही का रास्ता नहीं, बल्कि समृद्धि का मार्ग है और इसी के दृष्टिगत केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2024-25 से 2028-29 की अवधि के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना–चतुर्थ (पीएमजीएसवाई-IV) को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य 62,500 किलोमीटर नई सर्व-मौसम सड़कों का निर्माण करके ग्रामीण संपर्क को बढ़ाना है। इसके लिए कुल 70,125 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय किया जाएगा। 2011 की जनसंख्या के मानदंडों के आधार पर 25,000 ऐसी ग्रामीण बस्तियों को प्रत्येक मौसम में सड़क संपर्क प्रदान करना है, जो अभी तक सड़क संपर्क से वंचित हैं। पीएमजीएसवाई के अंतर्गत बनने वाली इन नई सड़कों से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और विकास केंद्रों तक पहुंच में सुधार होगा। इस योजना का उद्देश्य 40 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित करना है।”
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने पीएमजीएसवाई को वर्ष 2000 में ग्रामीण इलाकों में स्थित बस्तियों को हर मौसम में सड़क संपर्क प्रदान करने की सोच के साथ शुरू किया था। अटल बिहारी वाजपेयी की इस सोच को प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बढ़ाने का कार्य किया। पीएमजीएसवाई योजना के विभिन्न चरणों के तहत शुरुआत से लेकर अब तक कुल 8,25,114 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 7,87,520 किलोमीटर सड़कें दिसंबर 2025 तक पूरी हो चुकी हैं। यह लगभग 95 प्रतिशत भौतिक प्रगति को दर्शाता है और अब तक लगभग 1,80,000 बस्तियों को इस योजना से जोड़ा गया है।”