हिम बस कार्ड अनिवार्यता के विरोध में महिलाओं का प्रदर्शन, 50% किराया छूट बिना शर्त जारी रखने की मांग

शिमला। राजधानी शिमला में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने हिम बस कार्ड को अनिवार्य बनाने के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। संगठन की राज्य महासचिव फाल्मा चौहान ने कहा कि महिलाओं को बस किराए में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट बिना किसी शर्त के जारी रहनी चाहिए और सरकार महिलाओं को हिम बस कार्ड बनवाने के लिए बाध्य न करे।
उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने 31 जनवरी तक हिम बस कार्ड बनवाना अनिवार्य बताया था, लेकिन बाद में बयान दिया गया कि महिलाओं को दी जा रही रियायतें जारी रहेंगी। ऐसे में सरकार की नीतियों को लेकर महिलाओं में भ्रम की स्थिति है।
फाल्मा चौहान ने कहा कि प्रदेश के अधिकतर बस रूट निजी बस ऑपरेटरों को दिए गए हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को बिना बस कार्ड के यात्रा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि 31 मार्च तक सभी महिलाओं को कार्ड बनवाने की शर्त लगाई जाती है और उसके बाद रियायत बंद कर दी जाती है, तो यह महिलाओं के लिए बड़ा आर्थिक बोझ होगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार लगातार बस रूट निजी ऑपरेटरों को दे रही है और कई रूट बंद किए जा चुके हैं। पहाड़ी राज्य हिमाचल में बस सेवा ही लोगों की जीवनरेखा है और ऐसे में एचआरटीसी को घाटे से निकालने के लिए महिलाओं और बच्चों पर आर्थिक बोझ डालना सही नहीं है।
महिला समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। इस दौरान समिति की ओर से एचआरटीसी प्रबंधन कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखी गईं।

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